गीत के बोल
ऊँचा रे झरोखा चढ़ि ताकथि दुल्हा के माइ
आ गे माइ हमरो दुलरुआ संगे केओ नहि जाय - 2
जुनि कानू जुनि खीजू दुल्हा के माइ
आ गे माइ तोहरो दुलरुआ संगे पाँचो बाजन जाय
आ गे माइ अहूँके दुलरुआ संगे पाँचो बाजन जाय
हाथी चढ़ल बाबा जँइहे आगू-पाछू भइया सब
आ गे माइ घोड़बा चढ़ल बहिनोइया चलि जाय - 2
आ गे माइ आँगुर धयने भतिजबा चलि जाय – 2
पाँजर लागल भागीन जाइऽ एतय तऽ लसाओन
आ गे माइ तोहरो दुलरुआ संगे सब केओ जाय - 2
आ गे माइ तोहरो दुलरुआ संगे पाँचो बाजन जाय
आ गे माइ तोहरो दुलरुआ संगे भतिजबा चलि जाय ।
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गाने का विवरण
यह गीत बरात के प्रस्थान के समय का है। पुराने दिनों में जब ब्याह कम उम्र में होता था और बरात में महिलायें नहीं जाया करती थीं - तब माँये अपने लाडले की बड़ी चिंता करती थीं। इस गीत में माँ की व्याकुलता झलक रही है- ऊंची खिड़की से बरात को जाते देख वह कह रही है की मेरा लाडला अकेला ही जा रहा है और आस परोस की औरते उसे दिलासा दे रही हैं की तुम्हारे दुलारे के साथ बहुत लोग हैं , भाई- भतीजा , पिता - बहनोई सभी हाथी घोड़े पर सवार दूल्हे के साथ है।
और गाने
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

प्रथम मास आषाढ़
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

हे उद्धो बड़ा रे चतुर
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जुनि करू राम वियोग
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

हम ने जियब बिनु राम
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

सखिया सावन में डर लागे
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पानहि शन धनी पातरी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा
ऐसे और गाने
ऊँचा रे झरोखा

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

