गाने का विवरण
समदाउन गीत मिथिला में विदाई के समय गाया जाता है, जब बेटी अपने मायके को छोड़कर ससुराल जाती है। समदाउन गीतों में माँ-बाप की व्याकुलता, सखियों का ढाढ़स बंधाना और बेटी के मन का बिछोह बेहद मार्मिक ढंग से व्यक्त होता है। पूरे वातावरण में विदाई का दर्द, कठोर से कठोर ह्रदय को पसीज देता है। इस गीत का सार यह समदाउन गीत उस पल को चित्रित करता है जब दुल्हन प्रस्थान के लिए तैयार है और घर के हर कोने में उसके जाने का एहसास गूंज रहा है। गीत में दुल्हन कहती हैं की मैं अनजान सी बाबा के भवन में सो रही थीं और अचानक कहार (डोली उठाने वाले) मुझे ससुराल ले जाने आ पहुंचे। विदाई की घड़ी में कोई दालान में रो रहा हैं तो कोई आँगन में । मैं राम की कसम दे पिता को दिलासा देती हूँ और खुद की कसम दे माँ को । अंत में सखियाँ माँ को समझाती हैं कि हर बेटी को ससुराल जाना होता है, यही समाज का नियम है।


























