गीत के बोल
समधि के हम गारि नइ दैय छी - 2
समधि के हम विनती करै छी,
समधि के हम मिनती करै छी ।
समधि के माय गोअरबा के दैय छी,
समधि के बहिनी गुअरबा के दैय छी,
गुअरबा सँ हम दूध मँगबै छी,
हे समधि सैह अहाँ के खुअबै छी - 2
समधि के हम गारि नइ दैय छी,
समधि के हम मिनती करै छी ।
समधि के समधिन के बनिआ के दैय छी,
समधि के बहिनी हम बनिआ के दैय छी,
बनिआ सँ हम चीनी मँगबबै छी - 2
सैह समधि के खुअबै छी,
यौ समधि सैह अहाँ के खुअबै छी,
समधि के हम गारि नइ दैय छी,
समधि के हम मिनती करै छी ।
समधि के मौसी के मरबड़ीया के दैय छी,
समधि के पीसी के मरबड़ीया के दैय छी,
मरबड़ीया सँ हम धोती मँगबबै छी,
मरबड़ीया सँ हम चदरि मँगबबै छी,
हे समधि सैह धोती अहाँ के दैय छी,
हे समधि सैह चदरि अहाँ के दैय छी,
समधि के हम गारि नइ दैय छी,
समधि के हम मिनती करै छी ।
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गाने का विवरण
डहकन एक हास्यात्मक गाली-गलौज से भरा गीत है, जो प्रायः बरात के भोजन के समय गाया जाता है। इसमें व्यंग्य और मज़ाक के साथ वर, वर के पिता और बारात के अन्य सदस्य तानों और चुटकियों का निशाना बनते हैं। इस गीत में दुल्हन के परिवार की महिलायें मज़ाक़िया अंदाज़ में कह रही हैं कि वह समधी को गाली नहीं दे रहीं, सिर्फ विनतीपूर्वक बता रहीं हैं की किस तरह उन्होंने वर के परिवार के सदस्यों के बदले में एक-एक खाने का सामान इकठा किया है।
और गाने
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

प्रथम मास आषाढ़
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हे उद्धो बड़ा रे चतुर
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जुनि करू राम वियोग
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हम ने जियब बिनु राम
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

सखिया सावन में डर लागे
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पानहि शन धनी पातरी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा
ऐसे और गाने
समधि के हम गारि नइ दैय छी

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा


