गीत के बोल
पानहि शन धनी पातरी, फूल सन सुन्दरी हे ।
आहे सेहो धनी दरदे बेआकुल, दगरी नचा हिएऽ रे ।।
ललना रे सेहो धनी दरदे बेआकुल, दगरी नचा हिएऽ रे ।
सासु मोरा सुतली भानस-घर, ननदी कोबर-घर हे ।।
ललना रे हुनि प्रभु सुतला मन्दिर-घर, किनका जगाएब रे ।-2
सासु मोरा उठली नचैइते, की ननदी बधइया माँगू रे ।
ललना रे हुनि प्रभु उठला चेहाइ, की किछु नहि राखब रे - 2
हाथी लुटाएब हाथीसार, की घोड़ा घोड़सार-घर रे ।
ललना रे सौँसे अयोध्या देब दान, की किछु नहि राखब रे ।।
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गाने का विवरण
सोहर गीत बच्चे के जन्म के उपलक्ष्य में गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत हैं और इनमें प्रायः श्रीकृष्ण या राम के जन्म का उल्लेख भी मिलता है।सोहर गीत अत्यंत भावनात्मक होते हैं, क्योंकि इनमें एक परिवार की नवजात शिशु से जुड़ी आशाएँ और इच्छाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। यह विशेष गीत प्रसव की वेदना और बच्चे के जन्म के बाद की हर्षोल्लासपूर्ण घड़ियां, दोनों को सुंदरता से चित्रित करता है। इस गीत के शुरुआत में नाज़ुक, कोमल प्रसूता की प्रसव पीड़ा का वर्णन है, और फिर नवजात शिशु के आगमन पर परिवार की खुशी का—जहाँ ननद इनाम की माँग करती है और पति, उमंग से ओतप्रोत होकर, अपना धन अयोध्या भर में बाँट देने की इच्छा प्रकट करते हैं।
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