गीत के बोल
धीया बिनु सूना भवन भेल अँगना
नयनासँ झड़ै नोर
के जे आओत चारू दिशासँ
ओ लपकी- झपकी लेब कोर
के जे सूना एतऽ मधु रस बोलीया
ककरा चुमब दुनू ठोर
के जे खाएत चीनी रे छोड़ी कऽ
के दधि माखन घृत घोर
ना धीया कोना सासुर जएती
धए राजs धए लोने जाए
भनहि विद्यापति सुनू हे मनाइनी !
सब धीया सासुर जाए....।।
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गाने का विवरण
समदाउन’ शब्द ‘सम्बोधन’ का अपभ्रंश है। समदाउन गीत विदाई के समय गाए जाते हैं, जब बेटी अपने परिवार को छोड़ ससुराल के लिए प्रस्थान करती है। इन गीतों में पिता की बेचैनी, माँ की चिंता और बेटी के बिछोह का भावपूर्ण चित्रण पूरे वातावरण को अत्यधिक मार्मिक बना देता है।इस गीत में माँ, विदाई के बाद बेटी की याद में व्यथित है। घर बिल्कुल सूना लग रहा है और उसे बेटी की शरारतें याद आ रही हैं — दूध, दही और चीनी चुराकर खाना, अचानक गोद में कूद परना, और उसकी मीठी बातें — हर स्मृति माँ का हृदय व्याकुल कर देती है। सहेलियाँ उसे समझाती हैं कि हर लड़की को एक दिन ससुराल जाना होता है, इसलिए मन छोटा न करो।
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डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जुनि करू राम वियोग
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

हम ने जियब बिनु राम
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

सखिया सावन में डर लागे
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पानहि शन धनी पातरी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा
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धीया बिनु सूना

चलु देखु भरि नयना
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प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

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डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

