गीत के बोल
बरसा बरसे रे सबरिया सोहाग बरसे - 2
सितफूल पे बरसे नथिया पे बरसे - 2
बरसा बरसे रे सबरिया सोहाग बरसे - 2
झुमका पे बरसे नकलेस पे बरसे - 2
बरसा बरसे रे सबरिया सोहाग बरसे - 2
चूड़ी पे बरसे कङ्गन पे बरसे - 2
बरसा बरसे रे सबरिया सोहाग बरसे - 2
डरकस पे बरसे पायल पे बरसे - 2
बरसा बरसे रे सबरिया सोहाग बरसे - 2
दुल्हा पे बरसे दुल्हिन पे बरसे - 2
बरसा बरसे रे सबरिया सोहाग बरसे - 2
नहिरा मे बरसे ससुरा मे बरसे - 2
बरसा बरसे रे सबरिया सोहाग बरसे - 2
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गाने का विवरण
सोहाग मिथिला विवाह की एक रस्म है जिसमें धोबिन की मुख्य भूमिका होती है -- विवाह के दिन धोबिन दुल्हन को कपड़े बदलने में मदद करती है, उसे सुखी, समृद्ध और सौभाग्यशाली वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद देती है, और बदले में कपड़े, चूड़ी, सिंदूर, महावर आदि की भेंट पाती है। सोहाग की रस्म के वक़्त गाये जाने वाले गीत को सोहाग कहते हैं। इस गीत में नववधू पर सौभाग्य की वर्षा की मंगलकामना की जा रही है। गीत में साड़ी, नथिया, झुमका, नेकलेस, चूड़ी, कंगन, पायल आदि श्रृंगार वस्तुओं पर सोहाग बरसने की कामना की गई है। अंत में दूल्हा-दुल्हन, मायके और ससुराल—सभी पर सोहाग बरसने की शुभ प्रार्थना की जाती है।
और गाने
कंचन झा

आओल सखि हे सर्व सोहाओन
कंचन झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

पाबनि हमहूँ पूजब
कंचन झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

हज़मा नहु नहु
कंचन झा

सामा खेलऽ गेलीयइ
कंचन झा

घुमैत-फिरैत गौरी
कंचन झा

बजलनि गिरजा सँ महादेव
कंचन झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा
ऐसे और गाने
बरसा बरसे रे सबरिया

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

