गीत के बोल
घर पछुअरबामे नाबी रे पोखरिया,
ताहि पोखरि घोँघरा सेमार हे। -2
ताहि पोखरि नैहाय गेलहुँ दुल्हा से सुन्दर दुल्हा,
मारि लेलनि रहुआ बुआर हे ।
घरसँ बाहर भेली कनियाँ हे सुहऽबे,
लए लेलनि रहुआ बुआर हे ।
मारलौ तऽ मारलौ प्रभु बड़ा बेस कयलहुँ,
मोरा सकै नहि हैत बनाएल हे। - 2
एतबा बचन सुनलनि सुन्दर दुल्हा,
भए गेला घोड़ा पर सवार हे। -2
घरसँ बाहर भेली कनियाँ हे सुहऽबे,
धय लेलनि घोड़ा के लगाम हे।- 2
अपने तऽ जाइ छी प्रभु देश रे बिदेशबा,
हमरो के कहाँ छोड़ने जाइ हे ।
नहिरा मे छौ गे धनी माय-बाप-भइया,
ससुरा मे लछुमण दिअरि हे ।
किए करथिन आहे प्रभु माय-बाप-भइया,
किए करथिन सुन्दर दिअरि हे ।
जुगे-जुगे जीबथु सुन्दर दुल्हा,
कनियाँ सुहऽबे के बढ़ौनि अहिबात हे ।
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गाने का विवरण
कोहबर घर का यह चुलबुला गीत दूल्हा–दुल्हन के मधुर नोकझोंक का मनोहर प्रसंग प्रस्तुत करता है। दुल्हन की सहेलियाँ छेड़ते हुए गाती हैं कि शादी के बाद दूल्हा घर के पीछे वाले तालाब से सुन्दर-सी मछली पकड़ लाता है और चाहता है कि दुल्हन उसे पकाकर सबको खिलाए। पर दुल्हन हँसते हुए इनकार कर देती है, जिससे दूल्हा नाराज़ होकर घोड़े पर सवार हो घर छोड़ने की जिद करने लगता है। दुल्हन तुरंत दौड़कर घोड़े की लगाम पकड़ लेती है और उसे प्यार से मना लेती है। थोड़ी-सी तकरार के बाद दोनों में सुलह हो जाती है और दूल्हा खुश होकर वापस आ जाता है। सखियाँ राहत की साँस लेते हुए दुल्हन के सुहाग की दीर्घायु की कामना करती हैं।
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रजनी-पल्लवी

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रजनी-पल्लवी

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रजनी-पल्लवी

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डॉ. रानी झा

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धीया बिनु सूना
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डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा


