
गीत के बोल
आजु सोभा जनक मन्दिर - 2
चलहुँ देखन जाइ हे - 2
जानकी के बर दुल्हा रघुबर - 2
धनुष टुटल आजु हे - 2
पड़ल नग्र हकार घर-घर - 2
गाइनि जतअ छली नारी हे - 2
साजि डाला पान चानन - 2
लेसू चहुँमुख दीप हे - 2
आनि ठक-बक पात भालरि - 2
गला पहिराओल माल हे - 2
चाट मारि उठाए बिधकरी - 2
धएल शुभ घड़ी नाक हे - 2
काहू के सिर कलश राखल - 2
चलह जहाँ रघुनाथ हे - 2
आजु शोभा जनक मन्दिर,
चलहुँ देखन जाहुँ हे ।
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गाने का विवरण
मिथिला विवाह परंपरा में परिछन गीत विशेष महत्व रखते हैं। ये गीत विवाह-समारोह के दौरान दूल्हे का स्वागत करते हुए गाए जाते हैं। यह परिछन गीत उस उल्लासपूर्ण क्षण का चित्रण करता है जब जनकपुर (मिथिला) राम–सीता विवाह के आनंद में सराबोर है। वर राम ने धनुष तोड़कर विवाह का शुभ संयोग रचा है और पूरे नगर में हर्षोल्लास का वातावरण है। हर घर में न्योता दिया जा रहा है, महिलाएँ मंगलगीत गा रही हैं और दीपों की रोशनी से पूरा नगर जगमगा रहा है। गीत में परिछन के समय निभाई जाने वाली परंपराओं का भी उल्लेख है, और सभी एक स्वर में कहते हैं कि आज जनक मंदिर की शोभा अद्भुत है।
और गाने
डॉ. रानी झा

पहिल सपन देवकी देखली
डॉ. रानी झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

कमल नयन मन मोहन रे
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जपत मन आनन्द
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

साँझ भइ घर दिअरा जरी रे
डॉ. रानी झा

कोने बाबा घर साँझ
डॉ. रानी झा

सखी हे साँझ भयओ
डॉ. रानी झा

कमल नयन परदेश हे भामिनी
डॉ. रानी झा
ऐसे और गाने
आजु सोभा जनक मन्दिर

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

