
गीत के बोल
साँझ भइ घर दिअरा जरी रे,
दिअरा के चकमक जोति बढ़ी रे ।
कथी के रे दीप कथिये सूत-बाती,
कथी के तेल जराएब सारी राती ।
सोना के रे दिअरा पाट सूत-बाती,
सरिसओ के तेल जराएब सारी राती ।
जरऽ लागल दिअरा झमकए लागल बाती,
खेलय लगली सँझा मइया चारू पहर राती ।
साँझ भइ घर दिअरा जरी रे,
दिअरा के चकमक जोति बढ़ी रे ।
साँझ भइ ।
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