भारतीय महिला आँगन में तुलसी के सामने दीया जलाते हुए
भारतीय महिला आँगन में तुलसी के सामने दीया जलाते हुए

गीत के बोल

साँझ दिअ साँझ दिअ यशोमती मैया,
हे साँझ बीतल जाइयऽ। - 2

दिअ ने कोबर-घर साँझ,
हे साँझ बीतल जाइयऽ। - 2

कथी के रे दीपक कथीये सूत-बाती,
हे साँझ बीतल जाइयऽ। - 2
कथी के रे तेल जराएब,
हे साँझ बीतल जाइयऽ। - 2

सोना के रे दीप पटे सूत-बाती,
हे साँझ बीतल जाइयऽ। - 2

सरिसओ के तेल जराएब,
हे साँझ बीतल जाइयऽ। - 2

जरऽ लागल दीप झमकए लागल बाती,
हे साँझ बीतल जाइयऽ । - 2
खेलऽ लगलि सँझा मैया राति,
हे साँझ बीतल जाइयऽ। - 4


पूरे बोल देखें

गाने का विवरण

साँझ गीत मिथिला के गाँवों में गोधूलि बेला के साथ गूंज उठते हैं। ये गीत जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़े होते हैं और मुँडन, उपनयन, विवाह जैसे शुभ संस्कारों के अवसर पर भी गाए जाते हैं। यह विशेष साँझ गीत विवाह के समय गाया जाता है। इसमें यशोमती मैया से कोहबर घर में दीप प्रज्वलित करने को कहा जा रहा है। गीत प्रश्न-उत्तर के रूप में है, जहाँ दिए, बाती और तेल को लेकर संवाद है, और ज्योति प्रज्वलित होने के बाद जगमगाते दीप तथा संझा मैया के आगमन का वर्णन है।

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