झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ
झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

गीत के बोल

जखने बधइया माँगऽ,
अयलहुँ भैया अँगना,
से अयलहुँ भैया अँगना,
नुकाबऽ लगली हे - 2
भउजो हाथ के कंगनमा,
नुकाबऽ लगली हे,
भउजो हाथ के कंगनमा ।

भउजि कहै छथिन जे -
टुटि गेलइ हार ननदी, फुटि गेलइ थारी- 2
फाटि-चिट गेलइ धरोहर साड़ी - 2
किछु नै देखइ छी ननदी – 2
जे देब बधाइ,
जुड़ाउ ननदी हे - 2
देखि बौआ के नयनमा,
जुड़ाउ ननदी हे, देखि बौआ के नयनमा ।

ननदी कहै छथिन -
हम नै सुनब किछु, आब नै सुनाउ,- 2
बौआ के बधइया मे, कंगना लुटाउ, -2
खोलू सन्दूक निकालू कंगन,
से पहिराउ भउजि हे, ,
पहिराउ भउजि हे शुभ दिन मे कंगनमा,-3

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गीत के बोल

जखने बधइया माँगऽ,
अयलहुँ भैया अँगना,
से अयलहुँ भैया अँगना,
नुकाबऽ लगली हे - 2
भउजो हाथ के कंगनमा,
नुकाबऽ लगली हे,
भउजो हाथ के कंगनमा ।

भउजि कहै छथिन जे -
टुटि गेलइ हार ननदी, फुटि गेलइ थारी- 2
फाटि-चिट गेलइ धरोहर साड़ी - 2
किछु नै देखइ छी ननदी – 2
जे देब बधाइ,
जुड़ाउ ननदी हे - 2
देखि बौआ के नयनमा,
जुड़ाउ ननदी हे, देखि बौआ के नयनमा ।

ननदी कहै छथिन -
हम नै सुनब किछु, आब नै सुनाउ,- 2
बौआ के बधइया मे, कंगना लुटाउ, -2
खोलू सन्दूक निकालू कंगन,
से पहिराउ भउजि हे, ,
पहिराउ भउजि हे शुभ दिन मे कंगनमा,-3

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गीत के बोल

जखने बधइया माँगऽ,
अयलहुँ भैया अँगना,
से अयलहुँ भैया अँगना,
नुकाबऽ लगली हे - 2
भउजो हाथ के कंगनमा,
नुकाबऽ लगली हे,
भउजो हाथ के कंगनमा ।

भउजि कहै छथिन जे -
टुटि गेलइ हार ननदी, फुटि गेलइ थारी- 2
फाटि-चिट गेलइ धरोहर साड़ी - 2
किछु नै देखइ छी ननदी – 2
जे देब बधाइ,
जुड़ाउ ननदी हे - 2
देखि बौआ के नयनमा,
जुड़ाउ ननदी हे, देखि बौआ के नयनमा ।

ननदी कहै छथिन -
हम नै सुनब किछु, आब नै सुनाउ,- 2
बौआ के बधइया मे, कंगना लुटाउ, -2
खोलू सन्दूक निकालू कंगन,
से पहिराउ भउजि हे, ,
पहिराउ भउजि हे शुभ दिन मे कंगनमा,-3

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गाने का विवरण

मिथिला में बच्चे के जन्म पर बधइया गीत गाए जाते हैं। ये गीत शुभकामनाओं, उत्साह और हल्की-फुल्की नोकझोंक से भरे होते हैं। परिवार की महिलाएँ—विशेषकर ननद (पति की बहन) और भाभी—आपस में चुटकी लेते हुए हंसी का माहौल रचती हैं। इस अवसर पर उपहार और आशीर्वाद देने की परंपरा भी जुड़ी रहती है। यह मनभावन बधइया गीत ननद और भाभी की चंचल बातचीत को स्वर देता है। गीत की शुरुआत में ननद शिकायत करती है कि जैसे ही वह अपने भाई के घर पहुँची, भाभी ने अपने कंगन छिपा लिए । भाभी अपनी मज़बूरी जताते हुए जवाब देती है कि उसके पास तो कुछ भी नहीं है—हार टूटा हुआ है, थाली फूटी हुई है, साड़ी चिथड़ों में है—और ननद को बस नवजात शिशु की आँखों की चमक से संतोष कर लेना चाहिए। लेकिन ननद हार नहीं मानती और कहती है कि वह कोई बहाना नहीं सुनेगी —सन्दूक खोलिए और कंगन निकाल कर मुझे पहनाइए। हास-परिहास से भरा यह गीत न सिर्फ बच्चे के जन्म का उल्लास प्रकट करता है, बल्कि ननद भाभी के आपसी स्नेह को भी खूबसूरती से दर्शाता है।

के और गाने

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

ऐसी और गाने

जखने बधइया माँगऽ

एक सुंदर वर्गीय मंडला पैटर्न

तुलसी सुखिया गेला

दीप के पमरिया

एक सुंदर वर्गीय मंडला पैटर्न

तुलसी सुखिया गेला

दीप के पमरिया

एक सुंदर वर्गीय मंडला पैटर्न

तुलसी सुखिया गेला

दीप के पमरिया

मिथिला चित्रकला शैली में दो मछलियाँ और कमल

सासु मोरा ताना

दीप के पमरिया

मिथिला चित्रकला शैली में दो मछलियाँ और कमल

सासु मोरा ताना

दीप के पमरिया

मिथिला चित्रकला शैली में दो मछलियाँ और कमल

सासु मोरा ताना

दीप के पमरिया

पीछे संगीत वाद्ययंत्रों के साथ एक व्यक्ति एक भव्य लहंगा पहनकर घूमता हुआ

हमरे ननदिया के

दीप के पमरिया

पीछे संगीत वाद्ययंत्रों के साथ एक व्यक्ति एक भव्य लहंगा पहनकर घूमता हुआ

हमरे ननदिया के

दीप के पमरिया

पीछे संगीत वाद्ययंत्रों के साथ एक व्यक्ति एक भव्य लहंगा पहनकर घूमता हुआ

हमरे ननदिया के

दीप के पमरिया

महिला नया जन्मे बच्चे के पालने के चारों ओर इकट्ठा होकर और ढोल मजीरा के साथ गा रही हैं

घरबारी निपा लिय

दीप के पमरिया

महिला नया जन्मे बच्चे के पालने के चारों ओर इकट्ठा होकर और ढोल मजीरा के साथ गा रही हैं

घरबारी निपा लिय

दीप के पमरिया

महिला नया जन्मे बच्चे के पालने के चारों ओर इकट्ठा होकर और ढोल मजीरा के साथ गा रही हैं

घरबारी निपा लिय

दीप के पमरिया

पालने में बच्चा हंसती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

आई कलि के कनिया

दीप के पमरिया

पालने में बच्चा हंसती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

आई कलि के कनिया

दीप के पमरिया

पालने में बच्चा हंसती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

आई कलि के कनिया

दीप के पमरिया

मिथिला चित्रकला शैली में वनस्पति और जीव

राम के नामे

दीप के पमरिया

मिथिला चित्रकला शैली में वनस्पति और जीव

राम के नामे

दीप के पमरिया

मिथिला चित्रकला शैली में वनस्पति और जीव

राम के नामे

दीप के पमरिया

झूले में बच्चा, मिथिला प्रतिरूप

खेलेला अंगनमा

दीप के पमरिया

झूले में बच्चा, मिथिला प्रतिरूप

खेलेला अंगनमा

दीप के पमरिया

झूले में बच्चा, मिथिला प्रतिरूप

खेलेला अंगनमा

दीप के पमरिया

महिला नया जन्मे बच्चे के पालने के चारों ओर इकट्ठा होकर और ढोल मजीरा के साथ गा रही हैं

बड़ा शोर भेले ना

दीप के पमरिया

महिला नया जन्मे बच्चे के पालने के चारों ओर इकट्ठा होकर और ढोल मजीरा के साथ गा रही हैं

बड़ा शोर भेले ना

दीप के पमरिया

महिला नया जन्मे बच्चे के पालने के चारों ओर इकट्ठा होकर और ढोल मजीरा के साथ गा रही हैं

बड़ा शोर भेले ना

दीप के पमरिया

पालने में बच्चा हंसती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

राजाजी लागी गेला

दीप के पमरिया

पालने में बच्चा हंसती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

राजाजी लागी गेला

दीप के पमरिया

पालने में बच्चा हंसती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

राजाजी लागी गेला

दीप के पमरिया

झूले में बच्चा, मिथिला प्रतिरूप

पहिल सपन देवकी देखली

डॉ. रानी झा

झूले में बच्चा, मिथिला प्रतिरूप

पहिल सपन देवकी देखली

डॉ. रानी झा

झूले में बच्चा, मिथिला प्रतिरूप

पहिल सपन देवकी देखली

डॉ. रानी झा

बाल कट, भारतीय बच्चा, नाई

पिपही के बाजन सोहाओन

विभा झा

बाल कट, भारतीय बच्चा, नाई

पिपही के बाजन सोहाओन

विभा झा

बाल कट, भारतीय बच्चा, नाई

पिपही के बाजन सोहाओन

विभा झा

महिला नया जन्मे बच्चे के पालने के चारों ओर इकट्ठा होकर और ढोल मजीरा के साथ गा रही हैं

हर्षित मिथिलाक राजन जन जन हर्षित रे

रजनी-पल्लवी

महिला नया जन्मे बच्चे के पालने के चारों ओर इकट्ठा होकर और ढोल मजीरा के साथ गा रही हैं

हर्षित मिथिलाक राजन जन जन हर्षित रे

रजनी-पल्लवी

महिला नया जन्मे बच्चे के पालने के चारों ओर इकट्ठा होकर और ढोल मजीरा के साथ गा रही हैं

हर्षित मिथिलाक राजन जन जन हर्षित रे

रजनी-पल्लवी

पालने में बच्चा

पिया तोरा गोड़ लागु

विभा झा

पालने में बच्चा

पिया तोरा गोड़ लागु

विभा झा

पालने में बच्चा

पिया तोरा गोड़ लागु

विभा झा

पालने में बालक (राम - कृष्ण) मुस्कुराती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

पानहि शन धनी पातरी

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पालने में बालक (राम - कृष्ण) मुस्कुराती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

पानहि शन धनी पातरी

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पालने में बालक (राम - कृष्ण) मुस्कुराती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

पानहि शन धनी पातरी

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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