





गीत के बोल
पहिल सपन देवकी देखली पहिल पहाड़ राति रे,
ललना रे हरियर बाँसक बीत दुआरि बीच गारल र।
दोसर सपन देवकी देखली दोसर पहाड़ राति रे,
ललना रे छोटे मोटे अमबा के गाछ फले फूले बहुधन हे।
तेसर सपन देवकी देखली तेसर राति रे,
ललना रे पौरल दही के छाँछ आँचर तरे झाँपल हे।
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गीत के बोल
पहिल सपन देवकी देखली पहिल पहाड़ राति रे,
ललना रे हरियर बाँसक बीत दुआरि बीच गारल र।
दोसर सपन देवकी देखली दोसर पहाड़ राति रे,
ललना रे छोटे मोटे अमबा के गाछ फले फूले बहुधन हे।
तेसर सपन देवकी देखली तेसर राति रे,
ललना रे पौरल दही के छाँछ आँचर तरे झाँपल हे।
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गीत के बोल
पहिल सपन देवकी देखली पहिल पहाड़ राति रे,
ललना रे हरियर बाँसक बीत दुआरि बीच गारल र।
दोसर सपन देवकी देखली दोसर पहाड़ राति रे,
ललना रे छोटे मोटे अमबा के गाछ फले फूले बहुधन हे।
तेसर सपन देवकी देखली तेसर राति रे,
ललना रे पौरल दही के छाँछ आँचर तरे झाँपल हे।
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गाने का विवरण
यह सोहर गीत देवकी के बारे में है जब वह कृष्ण को गर्भ में धारण किए हुए थीं । इसमें तीन लम्बी रातों के तीन शुभ स्वप्नों का वर्णन है—प्रत्येक स्वप्न आने वाले दिव्य बालक का संकेत देता है। पहले स्वप्न में वह आँगन में हरा बाँस उगता देखती हैं; दूसरे में छोटे-छोटे आम के पेड़ फूलते-फलते दिखाई देते हैं; और तीसरे में स्वप्न में उनके आँचल के तले दही और छांछ ढके हैं। इन सपनों को भगवान कृष्ण के होने वाले जन्म के शुभ संकेत के रूप में देखा गया है।
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गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

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कमल नयन मन मोहन रे
डॉ. रानी झा

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आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

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जपत मन आनन्द
डॉ. रानी झा

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डॉ. रानी झा

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जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

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डॉ. रानी झा

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साँझ भइ घर दिअरा जरी रे
डॉ. रानी झा

साँझ भइ घर दिअरा जरी रे
डॉ. रानी झा

साँझ भइ घर दिअरा जरी रे
डॉ. रानी झा

कोने बाबा घर साँझ
डॉ. रानी झा

कोने बाबा घर साँझ
डॉ. रानी झा

कोने बाबा घर साँझ
डॉ. रानी झा

सखी हे साँझ भयओ
डॉ. रानी झा

सखी हे साँझ भयओ
डॉ. रानी झा

सखी हे साँझ भयओ
डॉ. रानी झा

कमल नयन परदेश हे भामिनी
डॉ. रानी झा

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डॉ. रानी झा

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तुलसी सुखिया गेला
दीप के पमरिया

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सासु मोरा ताना
दीप के पमरिया

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दीप के पमरिया

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हमरे ननदिया के
दीप के पमरिया

हमरे ननदिया के
दीप के पमरिया

हमरे ननदिया के
दीप के पमरिया

घरबारी निपा लिय
दीप के पमरिया

घरबारी निपा लिय
दीप के पमरिया

घरबारी निपा लिय
दीप के पमरिया

आई कलि के कनिया
दीप के पमरिया

आई कलि के कनिया
दीप के पमरिया

आई कलि के कनिया
दीप के पमरिया

राम के नामे
दीप के पमरिया

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दीप के पमरिया

राम के नामे
दीप के पमरिया

खेलेला अंगनमा
दीप के पमरिया

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दीप के पमरिया

बड़ा शोर भेले ना
दीप के पमरिया

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राजाजी लागी गेला
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जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

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पिपही के बाजन सोहाओन
विभा झा

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हर्षित मिथिलाक राजन जन जन हर्षित रे
रजनी-पल्लवी

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पिया तोरा गोड़ लागु
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पानहि शन धनी पातरी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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