
गीत के बोल
पहिल सपन देवकी देखली पहिल पहाड़ राति रे,
ललना रे हरियर बाँसक बीत दुआरि बीच गारल र।
दोसर सपन देवकी देखली दोसर पहाड़ राति रे,
ललना रे छोटे मोटे अमबा के गाछ फले फूले बहुधन हे।
तेसर सपन देवकी देखली तेसर राति रे,
ललना रे पौरल दही के छाँछ आँचर तरे झाँपल हे।
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गाने का विवरण
यह सोहर गीत देवकी के बारे में है जब वह कृष्ण को गर्भ में धारण किए हुए थीं । इसमें तीन लम्बी रातों के तीन शुभ स्वप्नों का वर्णन है—प्रत्येक स्वप्न आने वाले दिव्य बालक का संकेत देता है। पहले स्वप्न में वह आँगन में हरा बाँस उगता देखती हैं; दूसरे में छोटे-छोटे आम के पेड़ फूलते-फलते दिखाई देते हैं; और तीसरे में स्वप्न में उनके आँचल के तले दही और छांछ ढके हैं। इन सपनों को भगवान कृष्ण के होने वाले जन्म के शुभ संकेत के रूप में देखा गया है।
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