राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास
राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

कमल नयन परदेश हे भामिनी

कमल नयन परदेश हे भामिनी

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास
राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

गीत के बोल

कमल नयन परदेश हे भामिनी,
कमल नयन परदेश ।
राम लखन सिया बन को सिधारल,
धयलनि तपसी के भेस हे भामिनी,
कमल नयन परदेश ।
बनहि मे रहता बन फल खएताह,
बन-बन फिरथि नरेश हे भामिनी,
कमल नयन परदेश ।

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डॉ. रानी झा

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