
गीत के बोल
कमल नयन परदेश हे भामिनी,
कमल नयन परदेश ।
राम लखन सिया बन को सिधारल,
धयलनि तपसी के भेस हे भामिनी,
कमल नयन परदेश ।
बनहि मे रहता बन फल खएताह,
बन-बन फिरथि नरेश हे भामिनी,
कमल नयन परदेश ।
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डॉ. रानी झा

पहिल सपन देवकी देखली
डॉ. रानी झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

कमल नयन मन मोहन रे
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जपत मन आनन्द
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

साँझ भइ घर दिअरा जरी रे
डॉ. रानी झा

कोने बाबा घर साँझ
डॉ. रानी झा

सखी हे साँझ भयओ
डॉ. रानी झा

कमल नयन परदेश हे भामिनी
डॉ. रानी झा
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