डॉ. रानी झा
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मधुबनी में जन्मी और पली-बढ़ी डॉ. रानी झा मधुबनी चित्रकला की अग्रणी कलाकारों में मानी जाती हैं। परंपरागत होते हुए भी उनकी चित्रकला में समकालीनता की सजीव झलक मिलती है। उनके चित्र स्त्री जीवन के विविध पहलुओं के साथ-साथ लैंगिक हिंसा और विस्थापन जैसी चुनौतियों को गहरी संवेदनशीलता से अभिव्यक्त करते हैं।
उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा से 2010 में मिथिला पेंटिंग और साहित्य में महिलाओं का योगदान विषय पर पीएच.डी. प्राप्त की। नई पीढ़ी को इस धरोहर से जोड़ने के लिए वे मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ (मधुबनी, बिहार) में अध्यापन करती हैं, जहाँ वे युवा कलाकारों का मार्गदर्शन करती हैं।
उनकी कलात्मक और सांस्कृतिक नेतृत्व को सम्मानित करते हुए उन्हें मिथिला रत्न, मिथिला विभूति, अनेक राज्य स्तरीय पुरस्कार और गृहशोभा वुमन आइकन अवार्ड प्रदान किए गए हैं। हाल ही में बिहार सरकार ने उन्हें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रपति भवन में मधुबनी शैली कि एक भव्य अल्पना बनाने के लिए नामित किया । रानी जी ने पांच महिलाओं की टीम का नेतृत्व करते हुए यह कार्य बहुत ही कुशलता पूर्वक संपन्न किया।
डॉ. झा अक्सर कहती हैं, “मुझे अपनी संस्कृति से गहरा प्यार है।”, और इसीलिए पेशेवर गायिका ना होने के बावजूद उन्होंने खुशी-खुशी खमाज के लिए अपनी आवाज़ दी और कई पारंपरिक गीतों की रेकॉर्डिंग की ताकि आने वाली पीढ़ी इन गीतों को अपने वास्तविक स्वरुप में सुन सके।



















