
गीत के बोल
धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता,
धन-धन कोबरा के भाग हे ।
सिनुर झलकि गेल टिकुली चमकि गेल,
नूपुर सग अनमोल हे ।
आगू-आगू रामचन्द्र पाछू-पाछू सीता,
सखी सब मङ्गल गाओ हे ।
जुगे-जुगे जीबथु दुल्हा से रामचन्द्र दुल्हा,
सीता सुहबे के बढ़नू अहिबात हे ।
मदन मेधेश्वरी कोबर गाओल,
बर देखि नैना जुड़ाइ हे ।
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गाने का विवरण
मिथिला विवाह में कोहबर गीत विशेष स्थान रखते हैं। कोहबर घर वह कक्ष होता है जहाँ विवाह के बाद दूल्हा-दुल्हन पहली बार एक साथ बैठते हैं और वैवाहिक जीवन का शुभारंभ करते हैं। इस अवसर पर गाए जाने वाले गीत को कोहबर गीत कहा जाता है। गीतों में श्रृंगार, शुभकामना और पारिवारिक आनंद का अद्भुत समन्वय मिलता है।यह कोहबर गीत नवविवाहित दंपति को राम–सीता के दिव्य युगल से जोड़ते हुए मंगलकामनाएँ अर्पित करता है। गीत में गायिकाएँ दुल्हन के श्रृंगार—सिंदूर की झलक, चमकती टिकुली, नूपुर और अनमोल गहनों का मनोहारी चित्रण करती हैं। सखियों के सुरीले मंगलगीत के साथ नवदम्पति के एकसाथ कोहबर में प्रवेश का वर्णन है, और गीत का समापन इस पवित्र संयोग की युग-युग वृद्धि और अटूट सौभाग्य की कामना से होता है।
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डॉ. रानी झा

पहिल सपन देवकी देखली
डॉ. रानी झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

कमल नयन मन मोहन रे
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जपत मन आनन्द
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

साँझ भइ घर दिअरा जरी रे
डॉ. रानी झा

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डॉ. रानी झा

सखी हे साँझ भयओ
डॉ. रानी झा

कमल नयन परदेश हे भामिनी
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धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता

चलु देखु भरि नयना
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प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

