



गीत के बोल
परिछनि चलियौ सखी, सुन्दर जमैया हे सोहावन लागे - 2 हे सोहावन लागे ।
वर छथि बड़ सुकुमार, हे सोहावन लागे - 2
चम-चम चमकनि, सिर केर पाग हे सोहावन लागे - 2
नैना के काजर अनूप, हे सोहावन लागे - 2
सिया सुकुमारी देलखिन, अँचरा ओछाइ हे सोहावन लागे - 2
चलथिन पाहुन श्रीराम, हे सोहावन लागे - 2
धीरे-धीरे चलियौ रघुवर, अँचरा ने फाटै हे सोहावन लागे
धीरे-धीरे चलियौ पाहुन, अँचरा ने फाटै हे सोहावन लागे
अँचरा के दाम अनमोल, हे सोहावन लागे - 2
अँचरा के दाम सुनि, हँसला रघुवरजी हे सोहावन लागे
मिथिला के नारी, बड़ चतुर हे सोहावन लागे - 3
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गीत के बोल
परिछनि चलियौ सखी, सुन्दर जमैया हे सोहावन लागे - 2 हे सोहावन लागे ।
वर छथि बड़ सुकुमार, हे सोहावन लागे - 2
चम-चम चमकनि, सिर केर पाग हे सोहावन लागे - 2
नैना के काजर अनूप, हे सोहावन लागे - 2
सिया सुकुमारी देलखिन, अँचरा ओछाइ हे सोहावन लागे - 2
चलथिन पाहुन श्रीराम, हे सोहावन लागे - 2
धीरे-धीरे चलियौ रघुवर, अँचरा ने फाटै हे सोहावन लागे
धीरे-धीरे चलियौ पाहुन, अँचरा ने फाटै हे सोहावन लागे
अँचरा के दाम अनमोल, हे सोहावन लागे - 2
अँचरा के दाम सुनि, हँसला रघुवरजी हे सोहावन लागे
मिथिला के नारी, बड़ चतुर हे सोहावन लागे - 3
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गीत के बोल
परिछनि चलियौ सखी, सुन्दर जमैया हे सोहावन लागे - 2 हे सोहावन लागे ।
वर छथि बड़ सुकुमार, हे सोहावन लागे - 2
चम-चम चमकनि, सिर केर पाग हे सोहावन लागे - 2
नैना के काजर अनूप, हे सोहावन लागे - 2
सिया सुकुमारी देलखिन, अँचरा ओछाइ हे सोहावन लागे - 2
चलथिन पाहुन श्रीराम, हे सोहावन लागे - 2
धीरे-धीरे चलियौ रघुवर, अँचरा ने फाटै हे सोहावन लागे
धीरे-धीरे चलियौ पाहुन, अँचरा ने फाटै हे सोहावन लागे
अँचरा के दाम अनमोल, हे सोहावन लागे - 2
अँचरा के दाम सुनि, हँसला रघुवरजी हे सोहावन लागे
मिथिला के नारी, बड़ चतुर हे सोहावन लागे - 3
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गाने का विवरण
वर जब प्रथम प्रथम विवाह के लिए ससुराल पहुँचता है तो दुल्हन पक्ष की नारियाँ और किशोरियाँ स्वागत के समय उससे विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछती हैं और इस विधि को परिछन कहते हैं। पुराने समय में जब दूल्हे को देखे बिना विवाह होते थे तब इन प्रशनो के माध्यम से वर की बुद्धिमत्ता, समझदारी और बोलचाल की क्षमता की परीक्षा ली जाती थी। इस गीत में महिलाएँ अपनी सखियों को परिछन में चलने को कह रही हैं और साथ ही दूल्हे की सुंदरता का वर्णन करते हुए कह रही हैं की दूल्हा बड़ा सुकुमार है और उसके ललाट का चन्दन और काजल से सजे नयन बहुत सुहावने लगते हैं । दूल्हे को चिढ़ाते हुए वे उसे धीरे-धीरे चलने का आग्रह करती हैं ताकि वधू का अनमोल आँचल न फट जाए। गीत का समापन राम-समान दूल्हे के हँसते हुए मिथिला की चतुर-बुद्धि स्त्रियों की सराहना करने के साथ होता है।
के और गाने
विभा झा

दरदी सजना
विभा झा

दरदी सजना
विभा झा

दरदी सजना
विभा झा

मुदा छन मे
विभा झा

मुदा छन मे
विभा झा

मुदा छन मे
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
विभा झा

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
विभा झा

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
विभा झा

हम छी सीता
विभा झा

हम छी सीता
विभा झा

हम छी सीता
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा
ऐसी और गाने
परिछनि चलियौ सखी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

बाबा के अँगना
विभा झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

घर पछुअरबामे
विभा झा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा
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