गीत के बोल
चलु गौरी पूजन फुलवारी, जनक दुलारी ना।
साज सोलहो श्रृंगार, मिली सखी सब ठार
सिया पैहरु गऽ सुन्दर सारी, जनक दुलारी ना।
चलु गौरी पूजन फुलवारी , जनक दुलारी ना।
लिय कंचन थारी, भरी करा अनार
नेबा मिश्री सॅ भरि लिय थारी
जनक दुलारी ना।
चलु गौरी पूजन फुलवारी, जनक दुलारी ना।
लिय धुप के गुग्गुल, आरती के कपूर
सिया लेसु गऽ चौमुख बाटी
जनक दुलारी ना।
चलु गौरी पूजन फुलवारी, जनक दुलारी ना।
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और गाने
कंचन झा

आओल सखि हे सर्व सोहाओन
कंचन झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

पाबनि हमहूँ पूजब
कंचन झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

हज़मा नहु नहु
कंचन झा

सामा खेलऽ गेलीयइ
कंचन झा

घुमैत-फिरैत गौरी
कंचन झा

बजलनि गिरजा सँ महादेव
कंचन झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा
ऐसे और गाने
चलु गौरी पूजन फुलवारी

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

