गीत के बोल
हज़मा नहु नहु बऊआ केर केश काटू ना
नटुआ धीरे धीरे अँगना में नाच करू ना
कियो चानन घसै कियो मेहँदी पीसै
कियो पियर धोती मरबा पर टांग देलखिन ना
कियो खोपा सरियोति, कियो काजर लगौती
कियो मिसर के बहिन पर ढरैये देलखिन ना
बितपैन काज में बेहाल चिलका कोरा के जपाल
मैयां फैदा क दिन गमाइये देलखिन ना
नानी भेली बऊआ के मामी एली बऊआ के
मौसी झुमरीतलैया बाली आईऐ गेलखिन ना
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गाने का विवरण
मुंडन जन्म के बाद किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इस अवसर पर बरुए (बच्चे) के बाल पहली बार काटे जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से कैंची से ही काटा जाता है और उस्तरा नहीं इस्तेमाल होता है। यह संस्कार प्रायः पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में संपन्न होता है। यह गीत बच्चे के बाल काटने के समय गाया जा रहा है। हजाम (नाई) से कहा जा रहा है कि वह बच्चे के बाल हल्के-हल्के काटे और नट से धीरे-धीरे नाचने की मनुहार की जा रही है। कोई चंदन घिसने में व्यस्त है, तो कोई धोती तैयार करने में। गीत में थोड़ा हँसी-मज़ाक भी नानी-दादी पर हल्के कटाक्ष के रूप में दिखता है। रिश्तेदारों के दूर-दूर से आने, महिलाओं के आँखों में काजल लगाने और बालों को जूड़े में बाँधने इत्यादि का वर्णन खुशहाली के माहौल को जीवंत कर देता है।
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कंचन झा

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कंचन झा

पाबनि हमहूँ पूजब
कंचन झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

हज़मा नहु नहु
कंचन झा

सामा खेलऽ गेलीयइ
कंचन झा

घुमैत-फिरैत गौरी
कंचन झा

बजलनि गिरजा सँ महादेव
कंचन झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा
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