गाने का विवरण
मुंडन जन्म के बाद किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इस अवसर पर बरुए (बच्चे) के बाल पहली बार काटे जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से कैंची से ही काटा जाता है और उस्तरा नहीं इस्तेमाल होता है। यह संस्कार प्रायः पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में संपन्न होता है। यह गीत बच्चे के बाल काटने के समय गाया जा रहा है। हजाम (नाई) से कहा जा रहा है कि वह बच्चे के बाल हल्के-हल्के काटे और नट से धीरे-धीरे नाचने की मनुहार की जा रही है। कोई चंदन घिसने में व्यस्त है, तो कोई धोती तैयार करने में। गीत में थोड़ा हँसी-मज़ाक भी नानी-दादी पर हल्के कटाक्ष के रूप में दिखता है। रिश्तेदारों के दूर-दूर से आने, महिलाओं के आँखों में काजल लगाने और बालों को जूड़े में बाँधने इत्यादि का वर्णन खुशहाली के माहौल को जीवंत कर देता है।











