
मुंडन जन्म के बाद किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण संस्कार है। इस अवसर पर बरुए (बच्चे) के बाल पहली बार काटे जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से कैंची से ही काटा जाता है। यह संस्कार प्रायः पहले, तीसरे या पाँचवें वर्ष में संपन्न होता है।
गीतों में
मुंडन

कोने बाबा हरबा जोताओल
डॉ. रानी झा

मोती-मालवला बरुआ के
विभा झा

पिपही के बाजन सोहाओन
विभा झा

हज़मा नहु नहु
कंचन झा


