कंचन झा - उनकी गायन शैली मैथिल स्त्रियों की उस प्रामाणिक लोकगायन परंपरा को अभिव्यक्त करती है
कंचन झा - उनकी गायन शैली मैथिल स्त्रियों की उस प्रामाणिक लोकगायन परंपरा को अभिव्यक्त करती है
कंचन झा - उनकी गायन शैली मैथिल स्त्रियों की उस प्रामाणिक लोकगायन परंपरा को अभिव्यक्त करती है

कंचन झा

हमारे बारे में

कंचन झा का मूल निवास सहरसा ज़िले के लगमा गाँव, बिहार में है और वर्तमान में वे आदित्यपुर, जमशेदपुर में रहती हैं। बचपन से ही संगीत उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। उनके पिता रमाकांत ठाकुर संगीत के गहरे प्रेमी थे, कई वाद्ययंत्रों में निपुण थे और गाँव के धार्मिक आयोजनों में गाते थे। उनकी माता सुशीला देवी स्वयं एक प्रतिभाशाली मैथिली गायिका थीं, जिन्होंने कंचन को अनेक पारंपरिक गीत सिखाए। इस समृद्ध संगीतमय परिवेश में अपना बचपन गुजारने के कारण कंचन के भीतर गायन की  प्रतिभा नैसर्गिक रूप से उत्पन्न हुई और  मिथिला की लोकपरंपराओं से  गहरा जुड़ाव विकसित हुआ।  

गृहस्थ जीवन की ज़िम्मेदारियों और बच्चों की देखभाल के साथ संतुलन बनाते हुए कंचन झा इन कालातीत धुनों को आज भी जीवित रखे हुए हैं। वे परंपराओं और उनसे जुड़े गीतों के प्रति गहरी निष्ठा रखती हैं। उनकी गायन शैली मैथिल स्त्रियों की उस प्रामाणिक लोकगायन परंपरा को अभिव्यक्त करती है, जो की इस सांस्कृतिक धरोहर की सच्ची संरक्षक रही हैं।

शीर्ष गाने द्वारा

कंचन झा

नई शादीशुदा लड़कियाँ मधुश्रावणी के लिए फूल इकट्ठा कर रही हैं

आओल सखि हे सर्व सोहाओन

कंचन झा

नई शादीशुदा लड़कियाँ मधुश्रावणी के लिए फूल इकट्ठा कर रही हैं

आओल सखि हे सर्व सोहाओन

कंचन झा

नई शादीशुदा लड़कियाँ मधुश्रावणी के लिए फूल इकट्ठा कर रही हैं

आओल सखि हे सर्व सोहाओन

कंचन झा

एक जीवंत मिथिला विवाह - दुल्हन और उसकी सहेलियाँ - पुष्प और लोक आकृतियाँ

बरसा बरसे रे सबरिया

कंचन झा

एक जीवंत मिथिला विवाह - दुल्हन और उसकी सहेलियाँ - पुष्प और लोक आकृतियाँ

बरसा बरसे रे सबरिया

कंचन झा

एक जीवंत मिथिला विवाह - दुल्हन और उसकी सहेलियाँ - पुष्प और लोक आकृतियाँ

बरसा बरसे रे सबरिया

कंचन झा

पूजा थाली

पाबनि हमहूँ पूजब

कंचन झा

पूजा थाली

पाबनि हमहूँ पूजब

कंचन झा

पूजा थाली

पाबनि हमहूँ पूजब

कंचन झा

शादी, कोहबर, दुल्हन

चलु गौरी पूजन फुलवारी

कंचन झा

शादी, कोहबर, दुल्हन

चलु गौरी पूजन फुलवारी

कंचन झा

शादी, कोहबर, दुल्हन

चलु गौरी पूजन फुलवारी

कंचन झा

बच्चा मुंडन के लिए बैठा है, नाई बाल काटने के लिए तैयार है

हज़मा नहु नहु

कंचन झा

बच्चा मुंडन के लिए बैठा है, नाई बाल काटने के लिए तैयार है

हज़मा नहु नहु

कंचन झा

बच्चा मुंडन के लिए बैठा है, नाई बाल काटने के लिए तैयार है

हज़मा नहु नहु

कंचन झा

दो पक्षी, मधुबनी पेंटिंग, मिथिला मोटिफ

सामा खेलऽ गेलीयइ

कंचन झा

दो पक्षी, मधुबनी पेंटिंग, मिथिला मोटिफ

सामा खेलऽ गेलीयइ

कंचन झा

दो पक्षी, मधुबनी पेंटिंग, मिथिला मोटिफ

सामा खेलऽ गेलीयइ

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

घुमैत-फिरैत गौरी

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

घुमैत-फिरैत गौरी

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

घुमैत-फिरैत गौरी

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

बजलनि गिरजा सँ महादेव

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

बजलनि गिरजा सँ महादेव

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

बजलनि गिरजा सँ महादेव

कंचन झा

दुल्हन के परिवार की महिलाएँ सजे हुए डाला के साथ दूल्हे का स्वागत कर रही हैं

परिछी कोई ले रे

कंचन झा

दुल्हन के परिवार की महिलाएँ सजे हुए डाला के साथ दूल्हे का स्वागत कर रही हैं

परिछी कोई ले रे

कंचन झा

दुल्हन के परिवार की महिलाएँ सजे हुए डाला के साथ दूल्हे का स्वागत कर रही हैं

परिछी कोई ले रे

कंचन झा

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