गीत के बोल
यौ दुल्हा चिन्ही लियौ,
यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
अँहु अपन दुलारी के,
के छथि प्राण पियारी से न। - 2
सुनय छी अहाँ छी बड़का ज्ञानी,
अहाँक बाप के तीन जनानी,-2
यौ दुल्हा बाजब कोनो
बात के सोच-विचारि के,
के छथि प्राण पियारी से नऽ। - 2
यौ दुल्हा रहय छी कोन ठाम,
चिन्हू कनिआँ बैसल बाम, - 2
अहाँ पकड़ि न लेबनि,
यौ अहाँ पकड़ि न लेबनि,
दहिना बैसल सारि के,
के छथि प्राण पियारी से नऽ ।
यौ दुल्हा पकड़ि न लेबनि,
दहिना बैसल सारि के,
के छथि प्राण पियारी से नऽ ।
आमक पल्लव लिअ हाथ,
हम सब देब अहाँक साथ,- 2
यौ अहाँ नहि चिन्हब तऽ,-2
पुछू केहन के नारी के,
के छथि प्राण पियारी से नऽ ।
दुल्हा चिन्ही लियौ,
अँहु अपन दुलारी के,
के छथि प्राण पियारी से नऽ। -2
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गाने का विवरण
यह गीत कन्या निरीक्षण का गीत है। बारात के आगमन के बाद दूल्हे को कोहबर घर में ले जाया जाता है, जहाँ दुल्हन और उसकी बहन को ज़मीन पर बैठाकर पीले वस्त्र से ढक दिया जाता है। इसके बाद दूल्हे से कहा जाता है कि वह अपनी दुल्हन को पहचाने।यह रस्म हंसी–मज़ाक और ठिठोली से भरपूर है, जो की इस गीत में पूरी तरह उजागर हो रहा है । ललनाएँ दूल्हे के परिवार पर व्यंग्य कर रही हैं और साथ ही उसे चुनौती भी दे रही हैं कि वह अपनी प्राण–प्यारी को पहचान ले। गीत में दुल्हन को पहचानने के लिए कुछ संकेत भी दिए रहे हैं।
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विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा
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यौ दुल्हा चिन्ही लियौ

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अवध नगरिया सँ
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प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा


