गीत के बोल
जाहि घर आहो बाबा बेटी कुमारी
सेहो कोना सूतथिनी निश्चिन्त यौ। - 2
एतब बचन जब सुनलिनी अपन बाबा,
सुतल बाबा उठला चेहाई यौ। - 2
हाथ लेल छतबा की काँख लेल धोतिआ
चलहि गेला मगही मुंगेर यौ। - 2
उत्तर खोजल दक्षिण खोजल
खोजी लेला मगही मुंगेर यौ। - 2
धिया के जुगुति कतहुँ न भेटल,
आब धिया रहती कुमारी यौ। - 2
जूनि तोहें आहे बाबा मने मन सोचह
जूनि करू मनबा मलिन यौ। - 2
जइयो यौ बाबा नगर अयोध्या
खोजी लियौ सुन्दर जमाई यौ - 2
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गाने का विवरण
कुमार/ कुमारी गीत मिथिला के अविवाहित बालक और बालिकाओं से सम्बंधित गीत हैं। जब तक बच्चों की शादी नहीं हो जाती तब तक माता पिता को बड़ी चिंता लगी रहती है, ख़ास कर लड़की के विवाह को ले कर ।इस गीत में पिता की मनोदशा का चित्रण है। बेटी कहती है कि जब तक उसका विवाह नहीं हो जाता पिता चैन से कैसे सो सकते हैं। यह सुन पिता धोती -छाता ले उपयुक्त वर की तलाश में निकल पड़ते हैं—उत्तर, दक्षिण, मगही और मुंगेर तक जाते हैं—लेकिन कोई योग्य वर नहीं मिलता। बेटी मन ही मन सोचती है कि अयोध्या जाएँ, वहीं उचित वर मिलेगा।
और गाने
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

प्रथम मास आषाढ़
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

हे उद्धो बड़ा रे चतुर
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जुनि करू राम वियोग
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

हम ने जियब बिनु राम
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

सखिया सावन में डर लागे
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पानहि शन धनी पातरी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा
ऐसे और गाने
जाहि घर आहो बाबा

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

