गीत के बोल
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ - 2
श्याम घटा चहुँ ओर देखाबय, बिजुरी चमकय नऽ ।
सखी हे ! बिजुरी चमकय नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।
पिआ मोर परदेश गेल छथि – 2 , सुन सेजबा नऽ
सखी हे ! सुने सेजबा नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।
झीङुर दादुर मोर पपिहरा – 2, कोयली कुहके नऽ ।
सखी हे ! कोयली कुहके नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।
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डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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