बारिश, झूला, मधुबनी चित्रकला
बारिश, झूला, मधुबनी चित्रकला

गीत के बोल

सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ - 2
श्याम घटा चहुँ ओर देखाबय, बिजुरी चमकय नऽ ।
सखी हे ! बिजुरी चमकय नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।
पिआ मोर परदेश गेल छथि – 2 , सुन सेजबा नऽ
सखी हे ! सुने सेजबा नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।
झीङुर दादुर मोर पपिहरा – 2, कोयली कुहके नऽ ।
सखी हे ! कोयली कुहके नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।

पूरे बोल देखें

गीत के बोल

सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ - 2
श्याम घटा चहुँ ओर देखाबय, बिजुरी चमकय नऽ ।
सखी हे ! बिजुरी चमकय नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।
पिआ मोर परदेश गेल छथि – 2 , सुन सेजबा नऽ
सखी हे ! सुने सेजबा नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।
झीङुर दादुर मोर पपिहरा – 2, कोयली कुहके नऽ ।
सखी हे ! कोयली कुहके नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।

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गीत के बोल

सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ - 2
श्याम घटा चहुँ ओर देखाबय, बिजुरी चमकय नऽ ।
सखी हे ! बिजुरी चमकय नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।
पिआ मोर परदेश गेल छथि – 2 , सुन सेजबा नऽ
सखी हे ! सुने सेजबा नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।
झीङुर दादुर मोर पपिहरा – 2, कोयली कुहके नऽ ।
सखी हे ! कोयली कुहके नऽ ।
सखिया सावनमे डर लागे, जिअरा धर-धर धरकय नऽ ।

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के और गाने

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

एक बारात जुलूस, जिसमें दूल्हा हाथी पर बैठा है

ऊँचा रे झरोखा

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

एक बारात जुलूस, जिसमें दूल्हा हाथी पर बैठा है

ऊँचा रे झरोखा

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

एक बारात जुलूस, जिसमें दूल्हा हाथी पर बैठा है

ऊँचा रे झरोखा

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मधुबनी चित्रकला शैली में दो तोते

प्रथम मास आषाढ़

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मधुबनी चित्रकला शैली में दो तोते

प्रथम मास आषाढ़

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मधुबनी चित्रकला शैली में दो तोते

प्रथम मास आषाढ़

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राधा-कृष्ण, बारिश, झूला

हे उद्धो बड़ा रे चतुर

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राधा-कृष्ण, बारिश, झूला

हे उद्धो बड़ा रे चतुर

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राधा-कृष्ण, बारिश, झूला

हे उद्धो बड़ा रे चतुर

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

दुल्हन की डोली ले जाते हुए प्रतीकात्मक चित्रण, दुल्हन, माँ और लक्ष्मी के चरणों का चित्रण

धीया बिनु सूना

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

दुल्हन की डोली ले जाते हुए प्रतीकात्मक चित्रण, दुल्हन, माँ और लक्ष्मी के चरणों का चित्रण

धीया बिनु सूना

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

दुल्हन की डोली ले जाते हुए प्रतीकात्मक चित्रण, दुल्हन, माँ और लक्ष्मी के चरणों का चित्रण

धीया बिनु सूना

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

दूल्हा एक विस्तृत भोजन खाता है जिसमें एक प्लेट होती है और फिर विभिन्न खाद्य पदार्थों की संख्या में कटोरे होते हैं।

मेही भात जतन भनसिआ

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

दूल्हा एक विस्तृत भोजन खाता है जिसमें एक प्लेट होती है और फिर विभिन्न खाद्य पदार्थों की संख्या में कटोरे होते हैं।

मेही भात जतन भनसिआ

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

दूल्हा एक विस्तृत भोजन खाता है जिसमें एक प्लेट होती है और फिर विभिन्न खाद्य पदार्थों की संख्या में कटोरे होते हैं।

मेही भात जतन भनसिआ

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

एक मधुबनी शैली की कला जिसमें दूल्हा-दुल्हन और मिथिला के मोटिफ्स दिखाए गए हैं

जाहि घर आहो बाबा

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

एक मधुबनी शैली की कला जिसमें दूल्हा-दुल्हन और मिथिला के मोटिफ्स दिखाए गए हैं

जाहि घर आहो बाबा

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

एक मधुबनी शैली की कला जिसमें दूल्हा-दुल्हन और मिथिला के मोटिफ्स दिखाए गए हैं

जाहि घर आहो बाबा

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

जुनि करू राम वियोग

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

जुनि करू राम वियोग

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

जुनि करू राम वियोग

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम ने जियब बिनु राम

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम ने जियब बिनु राम

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम ने जियब बिनु राम

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

बारिश, झूला, मधुबनी चित्रकला

सखिया सावन में डर लागे

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

बारिश, झूला, मधुबनी चित्रकला

सखिया सावन में डर लागे

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

बारिश, झूला, मधुबनी चित्रकला

सखिया सावन में डर लागे

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पालने में बालक (राम - कृष्ण) मुस्कुराती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

पानहि शन धनी पातरी

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पालने में बालक (राम - कृष्ण) मुस्कुराती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

पानहि शन धनी पातरी

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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पानहि शन धनी पातरी

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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