मधुबनी चित्रकला शैली में दो तोते
मधुबनी चित्रकला शैली में दो तोते

गीत के बोल

प्रथम मास आषाढ़( अखार) सुन्दरी श्याम गेलि मोही तेजि यौ,
कोन विधि हम मास खेपब के हरत दुख मोर यौ ।
प्रथम मास आषाढ़( अखार) सुन्दरी श्याम गेलि मोही तेजि यौ,
कोन विधि हम मास खेपब के हरत दुख मोर यौ ।
साबन चमकए बिजुरी छिटकए हृदय हहरए मोर यौ - 2
आजु नहि नन्दलाल अओता आब जीवन कोन काज यौ - 2
भादब निशि अन्धयारी जामिनी लोकजीवन रङ्गक शब्द यौ,
श्याम सुन्दर कुबुझि बश भेल रहत मोही अऽब तेजि यौ,
श्याम सुन्दर कुबुझि बश भेल रहल मोही अऽब तेजि यौ,
आसिन हे सखी आश लगाओल आशो नहि पुरल हमार यौ - 2
राम-कृष्ण मोरारी भजू मन पुरत मन अभिलाष यौ,
पुरत मन अभिलाष यौ ।।

पूरे बोल देखें

गीत के बोल

प्रथम मास आषाढ़( अखार) सुन्दरी श्याम गेलि मोही तेजि यौ,
कोन विधि हम मास खेपब के हरत दुख मोर यौ ।
प्रथम मास आषाढ़( अखार) सुन्दरी श्याम गेलि मोही तेजि यौ,
कोन विधि हम मास खेपब के हरत दुख मोर यौ ।
साबन चमकए बिजुरी छिटकए हृदय हहरए मोर यौ - 2
आजु नहि नन्दलाल अओता आब जीवन कोन काज यौ - 2
भादब निशि अन्धयारी जामिनी लोकजीवन रङ्गक शब्द यौ,
श्याम सुन्दर कुबुझि बश भेल रहत मोही अऽब तेजि यौ,
श्याम सुन्दर कुबुझि बश भेल रहल मोही अऽब तेजि यौ,
आसिन हे सखी आश लगाओल आशो नहि पुरल हमार यौ - 2
राम-कृष्ण मोरारी भजू मन पुरत मन अभिलाष यौ,
पुरत मन अभिलाष यौ ।।

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गीत के बोल

प्रथम मास आषाढ़( अखार) सुन्दरी श्याम गेलि मोही तेजि यौ,
कोन विधि हम मास खेपब के हरत दुख मोर यौ ।
प्रथम मास आषाढ़( अखार) सुन्दरी श्याम गेलि मोही तेजि यौ,
कोन विधि हम मास खेपब के हरत दुख मोर यौ ।
साबन चमकए बिजुरी छिटकए हृदय हहरए मोर यौ - 2
आजु नहि नन्दलाल अओता आब जीवन कोन काज यौ - 2
भादब निशि अन्धयारी जामिनी लोकजीवन रङ्गक शब्द यौ,
श्याम सुन्दर कुबुझि बश भेल रहत मोही अऽब तेजि यौ,
श्याम सुन्दर कुबुझि बश भेल रहल मोही अऽब तेजि यौ,
आसिन हे सखी आश लगाओल आशो नहि पुरल हमार यौ - 2
राम-कृष्ण मोरारी भजू मन पुरत मन अभिलाष यौ,
पुरत मन अभिलाष यौ ।।

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गाने का विवरण

संस्कृत के चातुर्मास्य से उत्पन्न चौमासा गीत चार महीनों—आषाढ़, सावन, भाद्रपद और आश्विन—का भावपूर्ण चित्रण करते हैं, जिनमें नायिका के विरह की पीड़ा और व्याकुलता का मार्मिक स्वर सुनाई देता है। परंपरा के अनुसार इस अवधि में विवाह, यात्रा और विदाई जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं; यदि प्रिय आषाढ़ से पहले न लौट सके, तो उसे इन चार महीनों तक दूर ही रहना पड़ता है। इस गीत में भी नायिका श्याम के बिछोह में तड़प रही है—बिजुरी की चमक, मेघ की गर्जन और वर्षा की बूंदें उसके मन की उदासी को और गहरा कर देती हैं। हर बीतते मास के साथ उसकी आशा कम होती जाती है, फिर भी वह उनके लौटने की प्रार्थना और अभिलाषा को थामे प्रतीक्षा करती रहती है।

के और गाने

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

एक बारात जुलूस, जिसमें दूल्हा हाथी पर बैठा है

ऊँचा रे झरोखा

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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ऊँचा रे झरोखा

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ऊँचा रे झरोखा

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मधुबनी चित्रकला शैली में दो तोते

प्रथम मास आषाढ़

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राधा-कृष्ण, बारिश, झूला

हे उद्धो बड़ा रे चतुर

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राधा-कृष्ण, बारिश, झूला

हे उद्धो बड़ा रे चतुर

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दुल्हन की डोली ले जाते हुए प्रतीकात्मक चित्रण, दुल्हन, माँ और लक्ष्मी के चरणों का चित्रण

धीया बिनु सूना

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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डॉ. प्रेमलता मिश्रा

दूल्हा एक विस्तृत भोजन खाता है जिसमें एक प्लेट होती है और फिर विभिन्न खाद्य पदार्थों की संख्या में कटोरे होते हैं।

मेही भात जतन भनसिआ

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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डॉ. प्रेमलता मिश्रा

एक मधुबनी शैली की कला जिसमें दूल्हा-दुल्हन और मिथिला के मोटिफ्स दिखाए गए हैं

जाहि घर आहो बाबा

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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जाहि घर आहो बाबा

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राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

जुनि करू राम वियोग

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

जुनि करू राम वियोग

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

जुनि करू राम वियोग

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम ने जियब बिनु राम

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राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम ने जियब बिनु राम

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम ने जियब बिनु राम

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

बारिश, झूला, मधुबनी चित्रकला

सखिया सावन में डर लागे

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

बारिश, झूला, मधुबनी चित्रकला

सखिया सावन में डर लागे

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

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सखिया सावन में डर लागे

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पालने में बालक (राम - कृष्ण) मुस्कुराती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

पानहि शन धनी पातरी

डॉ. प्रेमलता मिश्रा

पालने में बालक (राम - कृष्ण) मुस्कुराती हुई महिलाओं से घिरा हुआ

पानहि शन धनी पातरी

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