गीत के बोल
माघ मोहन मेघ लागल, पिया चलल परदेश यौ
अपने बैसि पिया ओतहि गमाओल, हम धनी बिरह बताह यौ - 2
फागुन हे सखी अमुआ मजरी गेल, कोइली करय घमसान यौ - 2
कोइली शबद सुनी हिआ मोरा सालै, हिओ नै रहय मोर थिर यौ - 2
चैत हे सखी चित्त भेल चंचल, चित्तो नै रहय मोर थिर यौ- 2
रगड़ी चन्दन अंग लेपब,जौं गृही रहतथि कन्त यौ - 2
बैशाख हे सखी उखम ज्वाला, घाम सँ भिजल शरीर यौ- 2
रगड़ी चन्दन अंग लेपब,जौं गृही रहतथि कन्त यौ - 2
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विभा झा

दरदी सजना
विभा झा

मुदा छन मे
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
विभा झा

हम छी सीता
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा
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