
संस्कृत के चातुर्मास्य से उत्पन्न चौमासा गीत चार महीनों — आषाढ़, सावन, भाद्रपद और आश्विन — का भावपूर्ण चित्रण प्रस्तुत करते हैं। इन गीतों में नायिका के वियोग की पीड़ा और व्याकुलता का मार्मिक स्वर सुनाई देता है।
परंपरा के अनुसार, चातुर्मास में विवाह, यात्रा या विदाई जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। यदि प्रिय आषाढ़ से पहले न लौट सके, तो वह इन चार मासों तक दूर ही रहता है, और नायिका विरह से व्याकुल हो उठती है। चौमासा गीतों में मेघ, वर्षा और गर्जन का वर्णन नायिका की भावनाओं का प्रतिबिंब बन जाता है।
गीतों में




