गीत के बोल
गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे - 2
जनक भवनमे रामजी के संगमे - 2
गौरी पुजू जानकी जनक भवनमे - 2
आसन लाउ झट दऽ सिंहासन क्षणमे - 2
गौरी पुजू जानकी जनक भवनमे - 2
फूल लाउ झट दऽ बेल-पत्र लाउ क्षणमे - 2
गौरी पुजू जानकी जनक भवनमे - 2
धूप लाउ झट दऽ नवेद* लाउ क्षणमे - 2
गौरी पुजू जानकी जनक भवनमे - 2
जल लाउ झट दऽ सिन्दूर लाउ क्षणमे - 2
गौरी पुजू जानकी जनक भवनमे,
जनक भवनमे रामजी के संगमे - 2
गौरी पुजू जानकी जनक भवनमे - 3
पूरे बोल देखें
गाने का विवरण
मिथिला की विवाह परंपरा में प्रत्येक वधू विवाह से पहले और बाद में गौरी पूजन करती है। कोहबर घर में सम्पन्न इस अनुष्ठान में वधू को देवी पार्वती का प्रतिबिंब और वर को भगवान शिव के स्वरूप के रूप में देखा जाता है, जिससे उनका मिलन आध्यात्मिक और सांसारिक—दोनों स्तरों पर पवित्र और मंगलमय माना जाता है। इस गौरी पूजन गीत में जानकी की सखियाँ उन्हें विवाहोपरांत राम के साथ जनक भवन में पूजन हेतु आमंत्रित कर रही हैं। गीत में पूजा की सामग्री का क्रमवार वर्णन है—सखियाँ दुल्हन से आग्रह करती हैं कि वे शीघ्र ही आसन और सिंहासन, पुष्प, बेल-पत्र, धूप, नैवेद्य, जल और सिंदूर लाकर देवी गौरी को अर्पित करें।यह गीत प्रत्येक मिथिला विवाह को शिव–पार्वती और राम–सीता के दिव्य दांपत्य से जोड़ते हुए दंपति के लिए पावन आशीर्वाद का आह्वान करता है।
और गाने
विभा झा

दरदी सजना
विभा झा

मुदा छन मे
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
विभा झा

हम छी सीता
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा
ऐसे और गाने
गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

