गीत के बोल
बाबा के अँगना चनन-घन गछिया,
ताहि तर शीतल बसात यौ ।
बाबा के अँगना चनन-घन गछिया,
ताहि तर शीतल बसात यौ ।
ताहि तर बाबा पलंग ओछाओल,
सेहो बाबा सुतल निश्चिन्त यौ ।
सैह सुनि बाबा उठला चेहाइ,
चलि भेला मगह मुंगेर यौ ।
सैह सुनि बाबा उठला चेहाइ,
चलि भेला मगह मुंगेर यौ ।
दक्षिण खोजल बाबा पच्छिम खोजल,
खोजि लेल मगह मुंगेर यौ ।
दक्षिण खोजल बाबा पच्छिम खोजल,
खोजि लेल मगह मुंगेर यौ ।
तोरा जुगुति बेटी बर नहि भेटल,
भेटल तपसी भिखारी यौ ।
तोरा जुगुति बेटी बर नहि भेटल,
भेटल तपसी भिखारी यौ ।
अहाँ लेखे अइयो यौ बाबा तपसी भिखारी,
मोरा लेखे श्री भगवान यौ ।
अहाँ लेखे अइयो यौ बाबा तपसी भिखारी,
मोरा लेखे श्री भगवान यौ ।
भेल बिआह श्रीराम चलू कोबर,
लिखल मेटल नहि जाइ यौ ।
भेल बिआह श्रीराम चलू कोबर,
लिखल मेटल नहि जाइ यौ ।
लिखल मेटल नहि जाइ यौ - 2
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गाने का विवरण
समदाउन शब्द सम्बोधन का अपभ्रंश है। जब दुरागमन का दिन तय हो जाता है, तो सभी लोग जोर-शोर से तैयारियों में लग जाते हैं और इसी समय समदाउन के गीत गाए जाते हैं। ये गीत अत्यंत करुणामय होते हैं, क्योंकि पुराने समय में जब यातायात के साधन सीमित थे और दूरसंचार की कोई सुविधा नहीं थी, तब लड़कियों के लिए माता-पिता का घर छोड़ना बेहद कठिन अनुभव होता था। विदाई के दिन गाए जाने वाले समदाउन गीत श्रोताओं की आँखों में आँसू ले आते हैं। इनमें पिता की बेचैनी, माँ की चिंता और बेटी के बिछोह का ऐसा भावुक चित्रण होता है, जो पूरे वातावरण को और भी अधिक मार्मिक बना देता है। इस विशेष गीत में पिता अपनी बेटी से कहते हैं कि उन्होंने उसके लिए योग्य वर की तलाश में पूरी दुनिया देख डाली, पर केवल एक तपस्वी भिखारी ही मिल पाया। बेटी उत्तर देती है कि जो उसके पिता को भिखारी दिखते हैं, वे उसके लिए तो भगवान के समान हैं।
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आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
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डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
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गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
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धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

