गीत के बोल
सुनू सखिया हे आजु होइ छनि,
रघुवर के चुमाओन। - 2
आँगन चानन निपू कोशिल्या*,
सुनू सखिया हे गज-मोती चौका पुरान,
सुनू सखिया हे आजु होइ छनि,
रघुवर के चुमाओन ।
अलश-कलश लए पुरहर साजल,
सुनू सखिया हे मानिक लेसू प्रहनाद - 2
काँचहि बाँस केर डलबा बुनाओल,
सुनू सखिया हे ताहि सजल दुभि धान - 2
देशहि देश केर मुनि सब आओल,
सुनू सखिया हे शुभ-शुभ आशीष देल - 4
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गाने का विवरण
मिथिला में चुमान अधिकांश संस्कारों का अभिन्न अंग है। जन्म से जुड़े संस्कारों से लेकर विवाह तक, हर अवसर पर चुमान की परंपरा रही है। चुमान में आशीर्वाद का गहरा भाव निहित होता है। इस विवाह-संबंधित चुमान गीत में सखियाँ सबको बता रही हैं कि आज रघुबर का चुमान हो रहा है। माँ कौशल्या आँगन नीप कर उसे चमका चुकी हैं, और गीत में चुमान की अन्य सभी तैयारियों का भी मनोहर वर्णन है। दूर-दूर से ऋषि-मुनि भी नव दम्पति को आशीर्वाद देने पधारे हैं।
और गाने
विभा झा

दरदी सजना
विभा झा

मुदा छन मे
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
विभा झा

हम छी सीता
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा
ऐसे और गाने
सुनू सखिया हे

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा


