विभा झा
हमारे बारे में
प्रख्यात लोक गायिका विभा झा का जन्म मधुबनी ज़िले में स्थित उगना महादेव स्थान, पंडौल में हुआ था। मातृभाषा मैथिली से गहरे स्नेह के कारण उन्होंने लोकसंगीत को अपना जीवनधर्म बनाया।। उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा से एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की और संगीत प्रभाकर की उपाधि भी हासिल की। गायन के साथ-साथ वे एक प्रतिभाशाली लेखिका भी हैं। उनके लिखे आलेख श्यामा संदेश, मिथिला दर्पण, विद्यापति टाइम्स, मिथिला आवाज़ आदि अनेक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं।
उनके समर्पण की मान्यता स्वरूप 2024 में देवघर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन के दौरान विद्यापति सेवा संस्थान ने उन्हें “मिथिला रत्न” सम्मान से अलंकृत किया। इसके बाद 2025 में मिथिली लोक संस्कृति मंच, लहेरीयासराय द्वारा उन्हें “मिथिला सेवा सम्मान” प्रदान किया गया। ये सम्मान केवल पुरस्कार नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मैथिल समाज की कृतज्ञता और गौरव का प्रतीक हैं।
दरभंगा के श्यामा मंदिर में उन्हें प्रायः सुना जा सकता हैं, जहाँ वे मासिक भजन संध्या और दस दिवसीय नवाह यज्ञ में नियमित रूप से गाती हैं। श्रीमती विभा के स्वर में लोकजीवन की पीड़ा, आस्था, उल्लास और आत्मिक आनंद सभी एक साथ सुनाई देते हैं। गीतों के माध्यम से वे जो भाव प्रस्तुत करती हैं, वे मैथिली की सांस्कृतिक धरोहर की शाश्वत ज्योति को प्रज्वलित करते हैं।































