ब्रह्म स्थान - मिथिला क्षेत्र के गाँवों में ब्रह्म बाबा नामक लोक देवता की पूजा हेतु पवित्र स्थान
ब्रह्म स्थान - मिथिला क्षेत्र के गाँवों में ब्रह्म बाबा नामक लोक देवता की पूजा हेतु पवित्र स्थान

गीत के बोल

ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ - 2

पहिने मँगइ छी ब्राह्मण,
पहिने मँगइ छी यौ ब्राह्मण सिर के सिन्दुरवा,
ब्राह्मण बाबू यौ निरसल स्वामी के दियौ ने बनाइ ।
ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।

तखन मँगइ छी ब्राह्मण
तखन मँगइ छी यौ ब्राह्मण , गोदी के बलकवा ।
ब्राह्मण बाबू यौ, बाँझिन पद दियौ ने छोड़ाय ।
ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।

तखन मँगइ छी ब्राह्मण,
तखन मँगइ छी यौ ब्राह्मण भाइ-भतीजा ।
ब्राह्मण बाबू यौ उजड़ल नैहर दिअ ने बसाइ ।-2
ब्राह्मण बाबू यौ कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।

पूरे बोल देखें

गीत के बोल

ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ - 2

पहिने मँगइ छी ब्राह्मण,
पहिने मँगइ छी यौ ब्राह्मण सिर के सिन्दुरवा,
ब्राह्मण बाबू यौ निरसल स्वामी के दियौ ने बनाइ ।
ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।

तखन मँगइ छी ब्राह्मण
तखन मँगइ छी यौ ब्राह्मण , गोदी के बलकवा ।
ब्राह्मण बाबू यौ, बाँझिन पद दियौ ने छोड़ाय ।
ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।

तखन मँगइ छी ब्राह्मण,
तखन मँगइ छी यौ ब्राह्मण भाइ-भतीजा ।
ब्राह्मण बाबू यौ उजड़ल नैहर दिअ ने बसाइ ।-2
ब्राह्मण बाबू यौ कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।

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गीत के बोल

ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ - 2

पहिने मँगइ छी ब्राह्मण,
पहिने मँगइ छी यौ ब्राह्मण सिर के सिन्दुरवा,
ब्राह्मण बाबू यौ निरसल स्वामी के दियौ ने बनाइ ।
ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।

तखन मँगइ छी ब्राह्मण
तखन मँगइ छी यौ ब्राह्मण , गोदी के बलकवा ।
ब्राह्मण बाबू यौ, बाँझिन पद दियौ ने छोड़ाय ।
ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।

तखन मँगइ छी ब्राह्मण,
तखन मँगइ छी यौ ब्राह्मण भाइ-भतीजा ।
ब्राह्मण बाबू यौ उजड़ल नैहर दिअ ने बसाइ ।-2
ब्राह्मण बाबू यौ कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।

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गाने का विवरण

यह ब्रह्म गीत ग्राम देवता के स्तुति-गान के रूप में गाया जाता है। इसमें नायिका अपने जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर ब्रह्म की कृपा और सहारे की कामना करती है, ताकि उसका सामाजिक अस्तित्व सुरक्षित और सम्मानित बना रहे। वह अपने विवाह की सफल परिणति के लिए आशीर्वाद माँगती है, और बांझपन के कलंक से मुक्ति पाने हेतु संतान की कामना करती है। साथ ही, वह अपने मायके की समृद्धि के लिए भी प्रार्थना करती है—क्योंकि मायका ही उसके स्नेह, सुरक्षा और भावनात्मक आधार का स्थान है। गीत में ‘ब्राह्मण बाबू’ (ग्राम-रक्षक) उस संरक्षक शक्ति के रूप में सामने आते हैं, जो नायिका के जीवन के हर महत्वपूर्ण संस्कार को सुचारु रूप से पूरा कराने में सहायक होते हैं।

के और गाने

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

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गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

ऐसी और गाने

ब्राह्मण बाबू यौ

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