गीत के बोल
ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ - 2
पहिने मँगइ छी ब्राह्मण,
पहिने मँगइ छी यौ ब्राह्मण सिर के सिन्दुरवा,
ब्राह्मण बाबू यौ निरसल स्वामी के दियौ ने बनाइ ।
ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।
तखन मँगइ छी ब्राह्मण
तखन मँगइ छी यौ ब्राह्मण , गोदी के बलकवा ।
ब्राह्मण बाबू यौ, बाँझिन पद दियौ ने छोड़ाय ।
ब्राह्मण बाबू यौ, कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।
तखन मँगइ छी ब्राह्मण,
तखन मँगइ छी यौ ब्राह्मण भाइ-भतीजा ।
ब्राह्मण बाबू यौ उजड़ल नैहर दिअ ने बसाइ ।-2
ब्राह्मण बाबू यौ कनियो-कनियो होइयौ ने सहाइ ।
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गाने का विवरण
यह ब्रह्म गीत ग्राम देवता के स्तुति-गान के रूप में गाया जाता है। इसमें नायिका अपने जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर ब्रह्म की कृपा और सहारे की कामना करती है, ताकि उसका सामाजिक अस्तित्व सुरक्षित और सम्मानित बना रहे। वह अपने विवाह की सफल परिणति के लिए आशीर्वाद माँगती है, और बांझपन के कलंक से मुक्ति पाने हेतु संतान की कामना करती है। साथ ही, वह अपने मायके की समृद्धि के लिए भी प्रार्थना करती है—क्योंकि मायका ही उसके स्नेह, सुरक्षा और भावनात्मक आधार का स्थान है। गीत में ‘ब्राह्मण बाबू’ (ग्राम-रक्षक) उस संरक्षक शक्ति के रूप में सामने आते हैं, जो नायिका के जीवन के हर महत्वपूर्ण संस्कार को सुचारु रूप से पूरा कराने में सहायक होते हैं।
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