पूजा थाली
पूजा थाली

गीत के बोल

मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2

सासु बेदरदी दरदो नहि जानल - 2
भारो नहि देलनि पठाइ हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ,
नहि अएला बालम हमार हे - 2

गोतनो निदरदी दरदो नहि जानल,
गोतनो निदरदी जरतो नहि जानल,
गौरी नहि देलनि पठाइ हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2

ननदो बेदरदी दरदो नहि जनलनि – 2
फूल लोढ़ि नहि देलनि पठाइ हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2

पिआ बेदरदा दरदो नहि जनलनि - 2
अपनो नहि अएला शुभ काल हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 4


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गीत के बोल

मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2

सासु बेदरदी दरदो नहि जानल - 2
भारो नहि देलनि पठाइ हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ,
नहि अएला बालम हमार हे - 2

गोतनो निदरदी दरदो नहि जानल,
गोतनो निदरदी जरतो नहि जानल,
गौरी नहि देलनि पठाइ हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2

ननदो बेदरदी दरदो नहि जनलनि – 2
फूल लोढ़ि नहि देलनि पठाइ हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2

पिआ बेदरदा दरदो नहि जनलनि - 2
अपनो नहि अएला शुभ काल हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 4


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गीत के बोल

मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2

सासु बेदरदी दरदो नहि जानल - 2
भारो नहि देलनि पठाइ हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ,
नहि अएला बालम हमार हे - 2

गोतनो निदरदी दरदो नहि जानल,
गोतनो निदरदी जरतो नहि जानल,
गौरी नहि देलनि पठाइ हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2

ननदो बेदरदी दरदो नहि जनलनि – 2
फूल लोढ़ि नहि देलनि पठाइ हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 2

पिआ बेदरदा दरदो नहि जनलनि - 2
अपनो नहि अएला शुभ काल हे - 2
मोन छल पाबनि बलम संगे पुजितौ - 2
नहि अएला बालम हमार हे - 4


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गाने का विवरण

मधुश्रावणी नवविवाहितओं द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें वे अपने पति की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करतीं हैं। इस गीत में नायिका अपने पति की अनुपस्थिति से मन में गहरी व्यथा लिए हुए है। वह चाहती थी कि यह पावन पर्व वे दोनों साथ मिलकर मनाएँ, परन्तु पति के न आने से उसके मन की उमंग फीकी पड़ गई है। वह गिले-शिकवे के भाव से कहती है कि न सास-ननद ने गौरी, फूल और भार में पूजा के लिए आवश्यक सामग्री भेजे, और न ही पति इस शुभ अवसर पर उसके पास लौटकर आए। उसे लगता है कि इस समय पति से दूर रहने की उसकी पीड़ा को कोई नहीं समझता—न सास, न ननद और जेठानी न ही स्वयं पति।

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विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

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विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

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दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

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दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

मिथिला शादी

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विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

ऐसी और गाने

मोन छल पाबनि

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