गाने का विवरण
मधुश्रावणी नवविवाहितओं द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें वे अपने पति की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए प्रार्थना करतीं हैं। इस गीत में नायिका अपने पति की अनुपस्थिति से मन में गहरी व्यथा लिए हुए है। वह चाहती थी कि यह पावन पर्व वे दोनों साथ मिलकर मनाएँ, परन्तु पति के न आने से उसके मन की उमंग फीकी पड़ गई है। वह गिले-शिकवे के भाव से कहती है कि न सास-ननद ने गौरी, फूल और भार में पूजा के लिए आवश्यक सामग्री भेजे, और न ही पति इस शुभ अवसर पर उसके पास लौटकर आए। उसे लगता है कि इस समय पति से दूर रहने की उसकी पीड़ा को कोई नहीं समझता—न सास, न ननद और जेठानी न ही स्वयं पति।













