गाने का विवरण
उपनयन संस्कार के दौरान, मड़बा निपाइ नामक एक प्रथा होती है, जिसमें बच्चे की बुआ मड़बा (जहाँ संपूर्ण उपनयन के संस्कार होते हैं) को साफ-सुथरा कर सजाती हैं। यह गीत विशेष रूप से इसी मड़बा निपाइ के अवसर पर गाया जाता है। गीत की पंक्तियों में, बहनें अपने भाई से कहती हैं कि वे अपने भतीजे के लिए इतना परिश्रम कर रही हैं, इसलिए उन्हें पैसे मिलने चाहिए। वे भाई से आग्रह करती हैं कि वह उन्हें पहले ही कुछ तोहफा दे कर उनके मन को हर्षित कर दे । ठिठोली करते हुए वे कहती हैं कि भाई ने पिता से मिला सारा धन अपने पास रख लिया है और खुद की कमाई भी छुपा ली है। गीत में वे पूरी तरह से भाई को मड़बा निपाइ (मड़बे को साफ-सजाने) का पैसा देने के लिए मनाने की कोशिश करती हैं। यह गीत भाई बहिन के नोक झोंक को दर्शाता है।
ऐसी और गाने











