


उपनयन एक पवित्र संस्कार है जो छात्र की औपचारिक शिक्षा और आध्यात्मिक सीख की शुरुआत को दर्शाता है।इस समारोह के दौरान लड़के साधारण वस्त्र पहनते हैं, खड़ाऊँ (लकड़ी की चप्पल) धारण करते हैं, और परिजनों तथा गाँव के लोगों से भिक्षा माँगते हैं। यह प्रतीकात्मक क्रिया विनम्रता और ज्ञान की प्राप्ति के दौरान सादा जीवन जीने की शिक्षा देती है। इसी समय पहली बार जनेऊ (ब्रह्मसूत्र) धारण किया जाता है, इसलिए उपनयन को यज्ञोपवीत संस्कार भी कहा जाता है।
उपनयन एक पवित्र संस्कार है जो छात्र की औपचारिक शिक्षा और आध्यात्मिक सीख की शुरुआत को दर्शाता है।इस समारोह के दौरान लड़के साधारण वस्त्र पहनते हैं, खड़ाऊँ (लकड़ी की चप्पल) धारण करते हैं, और परिजनों तथा गाँव के लोगों से भिक्षा माँगते हैं। यह प्रतीकात्मक क्रिया विनम्रता और ज्ञान की प्राप्ति के दौरान सादा जीवन जीने की शिक्षा देती है। इसी समय पहली बार जनेऊ (ब्रह्मसूत्र) धारण किया जाता है, इसलिए उपनयन को यज्ञोपवीत संस्कार भी कहा जाता है।
गीतों में
उपनयन

कोने बाबा घर साँझ
डॉ. रानी झा

कोने बाबा घर साँझ
डॉ. रानी झा

कोने बाबा घर साँझ
डॉ. रानी झा

मड़बा निपाइ पहिने दियौ चुकाइ
विभा झा

मड़बा निपाइ पहिने दियौ चुकाइ
विभा झा

मड़बा निपाइ पहिने दियौ चुकाइ
विभा झा
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