शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली
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गीत के बोल

भोला किअ रुसल छी यौ - 2
झारखण्ड मे जा कऽ दानी - 2 किअ बसल छी यौ,
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

कते अधम के तारलहुँ भोला,
हमरो तारू यौ। - 2
एक बेर सुनयौ यौ बम भोला - 2
बिनती सुनयौ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

कुशेश्वर विदेशर गेलहुँ ,
कतउ नहि भेटलहुँ यौ। - 2
रने-बने ताकि कऽ बैसलहुँ - 2
तइयो नहि भेटलहुँ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

दुखहि जनम भेल दुखहि गमाओल,
आबहुँ तारीयौ यौ। - 2
बिपति के मोटरी सगरी जनम हम - 2
ढोइते रहलहुँ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

मन के मनोरथ मने मे राखल,
ककरा कहबइ यौ। - 2
द्वार छोड़ि नइ जायब भोला - 2
जँ नहि सुनबइ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

झारखण्ड मे जा कऽ दानी - 2
किअ बसल छी यौ,
यौ भोला किअ रुसल छी यौ - 3

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