शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली
शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

भोला किअ रुसल छी यौ

भोला किअ रुसल छी यौ

भोला किअ रुसल छी यौ

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली
शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

गीत के बोल

भोला किअ रुसल छी यौ - 2
झारखण्ड मे जा कऽ दानी - 2 किअ बसल छी यौ,
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

कते अधम के तारलहुँ भोला,
हमरो तारू यौ। - 2
एक बेर सुनयौ यौ बम भोला - 2
बिनती सुनयौ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

कुशेश्वर विदेशर गेलहुँ ,
कतउ नहि भेटलहुँ यौ। - 2
रने-बने ताकि कऽ बैसलहुँ - 2
तइयो नहि भेटलहुँ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

दुखहि जनम भेल दुखहि गमाओल,
आबहुँ तारीयौ यौ। - 2
बिपति के मोटरी सगरी जनम हम - 2
ढोइते रहलहुँ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

मन के मनोरथ मने मे राखल,
ककरा कहबइ यौ। - 2
द्वार छोड़ि नइ जायब भोला - 2
जँ नहि सुनबइ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

झारखण्ड मे जा कऽ दानी - 2
किअ बसल छी यौ,
यौ भोला किअ रुसल छी यौ - 3

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गीत के बोल

भोला किअ रुसल छी यौ - 2
झारखण्ड मे जा कऽ दानी - 2 किअ बसल छी यौ,
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

कते अधम के तारलहुँ भोला,
हमरो तारू यौ। - 2
एक बेर सुनयौ यौ बम भोला - 2
बिनती सुनयौ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

कुशेश्वर विदेशर गेलहुँ ,
कतउ नहि भेटलहुँ यौ। - 2
रने-बने ताकि कऽ बैसलहुँ - 2
तइयो नहि भेटलहुँ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

दुखहि जनम भेल दुखहि गमाओल,
आबहुँ तारीयौ यौ। - 2
बिपति के मोटरी सगरी जनम हम - 2
ढोइते रहलहुँ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

मन के मनोरथ मने मे राखल,
ककरा कहबइ यौ। - 2
द्वार छोड़ि नइ जायब भोला - 2
जँ नहि सुनबइ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

झारखण्ड मे जा कऽ दानी - 2
किअ बसल छी यौ,
यौ भोला किअ रुसल छी यौ - 3

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गीत के बोल

भोला किअ रुसल छी यौ - 2
झारखण्ड मे जा कऽ दानी - 2 किअ बसल छी यौ,
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

कते अधम के तारलहुँ भोला,
हमरो तारू यौ। - 2
एक बेर सुनयौ यौ बम भोला - 2
बिनती सुनयौ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

कुशेश्वर विदेशर गेलहुँ ,
कतउ नहि भेटलहुँ यौ। - 2
रने-बने ताकि कऽ बैसलहुँ - 2
तइयो नहि भेटलहुँ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

दुखहि जनम भेल दुखहि गमाओल,
आबहुँ तारीयौ यौ। - 2
बिपति के मोटरी सगरी जनम हम - 2
ढोइते रहलहुँ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

मन के मनोरथ मने मे राखल,
ककरा कहबइ यौ। - 2
द्वार छोड़ि नइ जायब भोला - 2
जँ नहि सुनबइ यौ ।
यौ भोला किअ रुसल छी यौ ।

झारखण्ड मे जा कऽ दानी - 2
किअ बसल छी यौ,
यौ भोला किअ रुसल छी यौ - 3

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के और गाने

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

ऐसी और गाने

भोला किअ रुसल छी यौ

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव, पार्वती, गणेश, शिव का परिवार

जपत मन आनन्द

डॉ. रानी झा

शिव, पार्वती, गणेश, शिव का परिवार

जपत मन आनन्द

डॉ. रानी झा

शिव, पार्वती, गणेश, शिव का परिवार

जपत मन आनन्द

डॉ. रानी झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

हम नै बिआहब

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

हम नै बिआहब

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

हम नै बिआहब

विभा झा

शिव, मधुबनी पेंटिंग शैली

छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ

रजनी-पल्लवी

शिव, मधुबनी पेंटिंग शैली

छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ

रजनी-पल्लवी

शिव, मधुबनी पेंटिंग शैली

छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ

रजनी-पल्लवी

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

बजलनि गिरजा सँ महादेव

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

बजलनि गिरजा सँ महादेव

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

बजलनि गिरजा सँ महादेव

कंचन झा

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