शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली
शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

गीत के बोल

हम नै बिआहब बूढ़ भङिया भिखारी,
धिया केना रहती-2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती – 2
हम नै बिआहब बूढ़ भङिया भिखारी,
धिया केना रहती – 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2

सुनइ छियै भोला के घरो नै घराड़ी - 2
आ भरना पड़ल छइ भाङक बाड़ी,
भरना पड़ल छइ भाङ के बाड़ी ।
बसहा बड़द सेहो मारय लथार,
धिया केना बन्हती – 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2

बाघ छाल आसन बसन मृग छाला - 3
कि बिषधर के डरे कियो भीखो नइ दैय छइ,
धिया भूखे मरती - 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2

फूल सन गौरी हम्मर भोला बकलेलहा - 3
कि एहन बौराहा संगे जीवन कोना कटती,
धिया केना रहती, धिया कोना रहती ।
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2
हम नै बिआहब बूढ़ भङिया भिखारी,
धिया केना रहती - 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 4

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गीत के बोल

हम नै बिआहब बूढ़ भङिया भिखारी,
धिया केना रहती-2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती – 2
हम नै बिआहब बूढ़ भङिया भिखारी,
धिया केना रहती – 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2

सुनइ छियै भोला के घरो नै घराड़ी - 2
आ भरना पड़ल छइ भाङक बाड़ी,
भरना पड़ल छइ भाङ के बाड़ी ।
बसहा बड़द सेहो मारय लथार,
धिया केना बन्हती – 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2

बाघ छाल आसन बसन मृग छाला - 3
कि बिषधर के डरे कियो भीखो नइ दैय छइ,
धिया भूखे मरती - 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2

फूल सन गौरी हम्मर भोला बकलेलहा - 3
कि एहन बौराहा संगे जीवन कोना कटती,
धिया केना रहती, धिया कोना रहती ।
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2
हम नै बिआहब बूढ़ भङिया भिखारी,
धिया केना रहती - 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 4

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गीत के बोल

हम नै बिआहब बूढ़ भङिया भिखारी,
धिया केना रहती-2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती – 2
हम नै बिआहब बूढ़ भङिया भिखारी,
धिया केना रहती – 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2

सुनइ छियै भोला के घरो नै घराड़ी - 2
आ भरना पड़ल छइ भाङक बाड़ी,
भरना पड़ल छइ भाङ के बाड़ी ।
बसहा बड़द सेहो मारय लथार,
धिया केना बन्हती – 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2

बाघ छाल आसन बसन मृग छाला - 3
कि बिषधर के डरे कियो भीखो नइ दैय छइ,
धिया भूखे मरती - 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2

फूल सन गौरी हम्मर भोला बकलेलहा - 3
कि एहन बौराहा संगे जीवन कोना कटती,
धिया केना रहती, धिया कोना रहती ।
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 2
हम नै बिआहब बूढ़ भङिया भिखारी,
धिया केना रहती - 2
भूत-प्रेतबा के संग में,
धिया केना रहती - 4

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के और गाने

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

एक महिला खिड़की के पास प्रतीक्षा कर रही है

दरदी सजना

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

दो मोर

मुदा छन मे

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

मिथिला शादी

एहन सुन्दर मिथिला धाम

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

मिथिला की महिलाएं अपनी सिर पर मिट्टी के घड़े के साथ गा रही हैं

हम छी सीता

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

झूले में नवजात शिशु परिवार के सदस्यों से घिरा हुआ

जखने बधइया माँगऽ

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

दुल्हन की विदाई, पालकी और कहार

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

राम, सीता, लक्ष्मण, वनवास

हम नइ जीयब बिनु राम

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

कोहबर घर, देवी की प्रतीक रूप में एक "सुपारी" रखी जाती है जो मिट्टी के हाथी के सिर पर रखा जाता है

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे

विभा झा

ऐसी और गाने

हम नै बिआहब

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

एहि बाटे भोला गेला

विभा झा

शिव, पार्वती, गणेश, शिव का परिवार

जपत मन आनन्द

डॉ. रानी झा

शिव, पार्वती, गणेश, शिव का परिवार

जपत मन आनन्द

डॉ. रानी झा

शिव, पार्वती, गणेश, शिव का परिवार

जपत मन आनन्द

डॉ. रानी झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

भोला किअ रुसल छी यौ

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

भोला किअ रुसल छी यौ

विभा झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

भोला किअ रुसल छी यौ

विभा झा

शिव, मधुबनी पेंटिंग शैली

छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ

रजनी-पल्लवी

शिव, मधुबनी पेंटिंग शैली

छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ

रजनी-पल्लवी

शिव, मधुबनी पेंटिंग शैली

छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ

रजनी-पल्लवी

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

बजलनि गिरजा सँ महादेव

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

बजलनि गिरजा सँ महादेव

कंचन झा

शिव पार्वती, मधुबनी पेंटिंग शैली

बजलनि गिरजा सँ महादेव

कंचन झा

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