दो महिलाएँ पेड़ के नीचे बातें कर रही हैं
दो महिलाएँ पेड़ के नीचे बातें कर रही हैं

गीत के बोल

की कहू पहु परदेश गेल सजनी गे
की कहू पहु परदेश गेल सजनी गे - 2
की कहू किछु नए सोहाय सजनी गे - 2
आँगन मोरा लेखे बिजुवन सजनी गे - 2
घर लागय दिवस अन्हार सजनी गे - 2
सूतक सेज बिखम सन सजनी गे - 2
तकिआ मोही नए सोहाय सजनी गे - 2
फुजल केश नीर बहु सजनी गे - 2
काजर गेल दहाय सजनी गे - 2
कतेक दिवस पर आओल सजनी गे - 2
पुरुषक नहि बिस्वास सजनी गे - 2

पूरे बोल देखें

गाने का विवरण

बटगबनी मिथिला की महिलाओं द्वारा गाँव की टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों पर चलते-चलते गाया जाने वाला मधुर लोकगीत है। ‘सजनी गे’ की टेक से पहचाने जाने वाले इस गीत में स्वरों के आरोह-अवरोह और संयोग-वियोग के भाव इसे अत्यंत मनमोहक बनाते हैं।इस गीत में नायिका अपने प्रिय के परदेस चले जाने से व्याकुल है और सखी से कह रही है कि प्रिय के बिना आँगन सूना और बियाबान लगता है, सेज भी नहीं सुहाती, और आँखों का काजल आँसुओं के साथ बह गया है। वह कहती है कि पता नहीं प्रिय कब आएँगे—आखिर पुरुषों पर भरोसा करना कठिन है। विरह की व्यथा और मिलन की अनिश्चितता—दोनों ही इस गीत के कोमल सुरों में गुंथे हैं।

कॉपीराइट © Khamaaj Foundation
सर्वाधिकार सुरक्षित
नियम और शर्तें | गोपनीयता नीति

विकसित और डिज़ाइन किया गया
डोपसोल स्टूडियो

कॉपीराइट © Khamaaj Foundation | सर्वाधिकार सुरक्षित
नियम और शर्तें | गोपनीयता नीति

विकसित और डिज़ाइन किया गया डोपसोल स्टूडियो

कॉपीराइट © Khamaaj Foundation | सर्वाधिकार सुरक्षित
नियम और शर्तें | गोपनीयता नीति

विकसित और डिज़ाइन किया गया डोपसोल स्टूडियो

Khamaaj brand logo in brand rust orange color
Hindi
Khamaaj brand logo in brand rust orange color
Hindi