
गीत के बोल
सखि हे! हमर दुखक नहि ओर - 2
ई भर बादर माह भादर - 2
सून मन्दिर मोर।
सखि हे! हमर दुखक नहि ओर - 2
झम्पि घन गरजन्ति सन्तत,
भुवन भरि बरसन्तिआ।
कन्त पाहुन काम दारुन - 2
सघन खर सर हन्तिया - 2
हमर दुखक नहि ओर।
सखि हे! हमर दुखक नहि ओर -4
कुलिस कत सत पात मुदित,
मयूर नाचत मातिया।
मत्त दादुर डाक डाहुकि -2
फाटि जाएत छातिया –2
हमर दुखक नहि ओर।
सखि हे! हमर दुखक नहि ओर।
तिमिर दिग भरि घोर यामिनी,
अथिर बिजुरी पान्तिया।
विद्यापति कइसे गमाएब -2
हरि बिना दिन-रातिया -2
हमर दुखक नहि ओर।
सखि हे! हमर दुखक नहि ओर।
सखि हे! हमर दुखक नहि,
हमर दुखक नहि, हमर दुखक नहि ओर।
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रजनी-पल्लवी

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रजनी-पल्लवी

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रजनी-पल्लवी

सतरंगी संसार सँ
रजनी-पल्लवी

लिख रहल छी चिट्ठी भइया
रजनी-पल्लवी
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