
रजनी-पल्लवी
हमारे बारे में
प्रख्यात गायिका रजनी पल्लवी का जन्म मधुबनी जिले के पिलखबार गाँव में हुआ। संगीत के प्रति उनके गहरे लगाव को देखते हुए परिवार ने उन्हें निरंतर प्रोत्साहित किया और उन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की।
रजनी मैथिली भाषा और मिथिला संस्कृति से गहरा प्रेम रखती हैं, और उन्होंने अपनी कला को मैथिली लोक संगीत के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया है। वे लोकप्रिय गीतों को नए संगीत संयोजन के साथ रिकॉर्ड करती हैं और यूट्यूब पर शेयर करती हैं, ताकि अच्छा संगीत अधिक से अधिक श्रोताओं तक पहुँच सके।
वे महाकवि विद्यापति की अमर रचनाओं के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।उनकी प्रसिद्ध और अल्पज्ञात रचनाओं को संगीतबद्ध कर अर्थ सहित ऑनलाइन उपलब्ध कराती हैं, ताकि महाकवि की विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहे।
मैथिली संगीत को युवा पीढ़ी के लिए आकर्षक बनाने के लिए रजनी ने आधुनिक कवियों के साथ मिलकर और नवीन वाद्ययंत्रों का उपयोग करते हुए नए मैथिली गीत रचे हैं जिन्हें विश्वभर में श्रोताओं ने सराहा है।
मैथिली के अलावा, रजनी पल्लवी की गज़ल और उप-शास्त्रीय संगीत में भी रुचि है। उनकी कई गज़लें ऑनलाइन उपलब्ध हैं, और इस समय वे ग़ालिब के कुछ दुर्लभ शेरों को संगीतबद्ध करने पर कार्य कर रही हैं।
अपनी रचनात्मक गतिविधियों के अलावा, रजनी बेंगलुरु में एक संगीत अकादमी चलाती हैं, जिसके द्वारा वे अगली पीढ़ी के संगीतकारों को प्रशिक्षित करती हैं ताकि हमारी सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहे।
उनका अपने श्रोताओं से विनम्र निवेदन है: इस प्राचीन विरासत को प्रोत्साहन दें। अच्छी कला, संगीत और मिथिला चित्रकला का समर्थन करें, और संस्कृति के नाम पर मैथिली की विकृति को अस्वीकार करें।
शीर्ष गाने
रजनी-पल्लवी

आयल चैत मधुर रंग पाँचम
रजनी-पल्लवी

यौ गजानन गणपति
रजनी-पल्लवी

कानि कानि कहथिन सीता
रजनी-पल्लवी

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

गाम के अधिकारी
रजनी-पल्लवी

कातिक मास बीतल सुकराती
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

सतरंगी संसार सँ
रजनी-पल्लवी

लिख रहल छी चिट्ठी भइया
रजनी-पल्लवी

कतय छी नुकायल अहाँ
रजनी-पल्लवी

विघ्नहरण गौरी के नन्दन
रजनी-पल्लवी

महादेव कहलनि नारद सँ
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

जय शिवप्रिये शंकरप्रिये
रजनी-पल्लवी

ओढ़नी में लागल दाग
रजनी-पल्लवी

गोल मोल सन चान गगन में
रजनी-पल्लवी

नन्दक नन्दन कदम्बक तरु तर
रजनी-पल्लवी

हथवा के लेलौं हम
रजनी-पल्लवी

हमर दुखक नहि ओर
रजनी-पल्लवी

हर्षित मिथिलाक राजन जन जन हर्षित रे
रजनी-पल्लवी

अंगना में लागल छै चंपा चमेली
रजनी-पल्लवी

छोटी-मोटी टुटली मड़ैआ
रजनी-पल्लवी

