
गीत के बोल
काँचहि बाँस के डोलिया बनाओल
चार कहरिया उठाय
सकल श्रृंगार कायल सजना लेल
प्राण चिडै उड़ि जाय
चानन काठक बनल पलंगिया रुसल ताहि लेटाय
जत राजा से मिलल सजनिया
धू धू तैं जड़ि जाय
साधो सजनी नैहरवा जाय
ओढनी मे लागल दाग हरि हे कोना छोड़ायब -3
बचपन अल्हड खेल गमाओल,तरुण अवस्था सोच ने आयल -3
तरुण अवस्था सोच ने आयल
यौवन डूबल राग हरि हे विषय बितायब
ओढनी मे लागल दाग हरि हे कोना छोड़ायब -३
आयल गृहस्थी दिन बीतेलहुँ, धरम करम के नाम ने लेलहुँ -3
धरम करम के नाम ने लेलहुँ
माथहि अर्थ सवार हरी हे हाड़ बुढायल
ओढनी मे लागल दाग हरि हे कोना छोड़ायब -३
यम के पास में अन्त फसायल, निर्मल जीवन व्यर्थ गमायल-3
निर्मल जीवन व्यर्थ गमायल
हाड़ चढ़ल भेल हार हरी हे शरण लगायब
ओढनी मे लागल दाग हरि हे कोना छोड़ायब -५
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