मधुबनी चित्रकला में गणेश — लड्डू और मोर के साथ
मधुबनी चित्रकला में गणेश — लड्डू और मोर के साथ

गीत के बोल

विघ्नहरण गौरी के नन्दन - 2
आउ हे गणपति अँगना मोर ।
पहिल अहीं के पूजन वन्दन,
आउ हे गणपति अँगना मोर।

देव-मनुख-मुनि महिमा गाबए,
मंगल मूर्ति मोदक भाबए। -2
रूप अहाँ के सदिखन सुमिरन - 2
आउ हे गणपति अँगना मोर ।
पहिल अहीं के पूजन वन्दन,
आउ हे गणपति अँगना मोर।
विघ्नहरण गौरी के नन्दन...।

राखल मोदक आरती थारी,
बिसरि अहाँ के रूप निहारी।-2
पिअर धोती पिअर अभरन - 2
आउ हे गणपति अँगना मोर ।
पहिल अहीं के पूजन वन्दन,
आउ हे गणपति अँगना मोर।
विघ्नहरण गौरी के नन्दन...।

बाल रूप देखि कौतुक भेल,
मुदित छवि उपमा की देल ।-2
सब फलदायक गिरिजा नन्दन - 2
आउ हे गणपति अँगना मोर ।
पहिल अहीं के पूजन वन्दन,
आउ हे गणपति अँगना मोर।
विघ्नहरण गौरी के नन्दन,
आउ हे गणपति अँगना मोर ।
पहिल अहीं के पूजन वन्दन,
आउ हे गणपति अँगना मोर - 3

पूरे बोल देखें

गाने का विवरण

भक्त भगवान गणेश से प्रार्थना कर रहा है कि वे उसके आँगन में पधारें। उन्हें विघ्नहर्ता, माता गौरी के पुत्र और मंगल के प्रतीक के रूप में पुकारा जा रहा है। भक्त की पुकार है — हे विघ्नों को हरने वाले, माता गौरी के नंदन! आप मेरे आँगन में पधारिए। सबसे पहले आपकी ही पूजा और वंदना होती है, इसलिए आइए और अपना स्थान ग्रहण करें। देवता, मनुष्य और मुनि — सभी आपकी महिमा का गुणगान करते हैं। आपकी मूर्ति मंगलकारी है और आपको मोदक अतिप्रिय हैं। भक्त कहता है कि मैं सदैव आपके इसी सुंदर रूप का स्मरण करता हूँ। आपके लिए मोदक और आरती की थाल सजाकर रखी है — पर आपका रूप इतना मनमोहक है कि दर्शन होते ही मैं अपनी सुध खो बैठता हूँ। पीली धोती और पीले आभूषणों में आप अत्यंत शोभायमान लग रहे हैं। हे गिरिजा नंदन! आपके बाल रूप को देखकर मन आनंद और कौतुक से भर उठता है। इस प्रसन्न छवि की उपमा किससे दी जाए — कोई भी तुलना कम ही पड़ेगी। आप सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले, सभी को फल देने वाले हैं।"

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