
गीत के बोल
कानि कानि कहथिन सीता
सुनू हनुमान यो
कोना कऽ बिसरि गेला-2
मोर भगवान यो
हरि बिनु सून भेल-2
सकल जहान यो
जल-थल सब लागय
अग्नि समान यो
कोना कऽ बिसरि गेला
तइयो नहि अधम तन सऽ
निकलैए प्राण यो
कहथिन सीता दाइ
सुनू हनुमान यो
कोना कऽ बिसरि गेला
मोर भगवान यो
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रजनी-पल्लवी

आयल चैत मधुर रंग पाँचम
रजनी-पल्लवी

यौ गजानन गणपति
रजनी-पल्लवी

कानि कानि कहथिन सीता
रजनी-पल्लवी

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

गाम के अधिकारी
रजनी-पल्लवी

कातिक मास बीतल सुकराती
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

सतरंगी संसार सँ
रजनी-पल्लवी

लिख रहल छी चिट्ठी भइया
रजनी-पल्लवी
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