
गीत के बोल
गोल मोल सन चान गगन में -2
हरियर खेतक धान रे
आसिन मासक शरद पूर्णिमा
कोजगरा के विधान रे
साजल डाला भरल चंगेरा - 3
केरा दही मखान रे
गीतगाइन सब गीत गबै छथि
होई छनि बऽर के चुमान रे -3
बऽरक पित्ती अति उल्लासित -3
परसै छाधिन्त मखान रे
मुट्ठी भरि भरि बांटि रहल छथि
आँगन सगर दलान रे
हँसी ठहाका मुस्की चुटकी - 3
भरि भरि खिल्ली पान रे
गऊआं घरुआ टोल पड़ोसी
देखथि समधि मिलान रे
गोल मोल सन चान गगन में
हरियर खेतक धान रे
आसिन मासक शरद पूर्णिमा, कोजगरा के विधान रे -3
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रजनी-पल्लवी

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रजनी-पल्लवी

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रजनी-पल्लवी

कानि कानि कहथिन सीता
रजनी-पल्लवी

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

गाम के अधिकारी
रजनी-पल्लवी

कातिक मास बीतल सुकराती
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

सतरंगी संसार सँ
रजनी-पल्लवी

लिख रहल छी चिट्ठी भइया
रजनी-पल्लवी
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