बारिश में झूले पर राधा कृष्ण

वर्षा ऋतु की रिमझिम फुहार जब सूखी धरती पर पड़ती है तो मानो प्रेमी हृदय और भी व्याकुल हो उठता है। मिथिला के मलार (मल्हार) गीतों में—जिन्हें कजरी भी कहते हैं—यह वियोग-भाव बड़ी प्रबलता से प्रकट होता है। "सखी रे" इन गीतों की खास पहचान है, क्योंकि विरहिणी अपने मन की सबसे गहरी बात सखी से ही कह पाती है।

गीतों में

मलार

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