
गीत के बोल
कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ ।
कखन हरब दुख मोर ।
दुखहि जनम भेल दुखहि गमाओल ।
सुख सपनहुँ नहि भेल हे भोलानाथ ।
कखन हरब दुख मोर ।
ई भब सागर थाह कतहुँ नहि ।
भैरव धरु करुआरि हे भोलानाथ ।
कखन हरब दुख मोर ।
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