
पराती मिथिला की एक मर्मस्पर्शी भक्ति गीत विधा है जो ब्रह्ममुहूर्त में गाई जाती है। स्त्री और पुरुष दोनों इन प्रातःकालीन गीतों के माध्यम से देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं और अपने हृदय की व्याकुलता, लालसा और विवशता को स्वर देते हैं। इन मधुर धुनों में ऐसी गहराई होती है कि गायक और श्रोता दोनों की आँखें नम हो जाती हैं। पराती गीत भक्ति और शांति का एक अनूठा संगम हैं।
गीतों में
पराती

जपत मन आनन्द
डॉ. रानी झा

कमल नयन परदेश हे भामिनी
डॉ. रानी झा

कखन हरब दुख मोर
डॉ. रानी झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

जुनि करू राम वियोग
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

हम ने जियब बिनु राम
डॉ. प्रेमलता मिश्रा


