
गीत के बोल
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गाने का विवरण
यह एक सुंदर सोहर गीत है जो राम और लक्ष्मण के जन्म का उत्सव प्रस्तुत करता है। इसे मिथिला संस्कृति में पारंपरिक पमरिया गायक गाते हैं। यह पावन गीत संतान की चाह में एक माँ की गहरी आकांक्षा को स्वर देता है, परिवार और प्रियजनों के आशीर्वाद को दर्शाता है, और ऐसे शुभ अवसरों पर होने वाले उत्सव और उल्लास को व्यक्त करता है। अपनी विशिष्ट गायकी और कथा-वाचन शैली के लिए प्रसिद्ध पमरिया इस दिव्य प्रसंग को जीवंत कर देते हैं।
और गाने
दीप के पमरिया

तुलसी सुखिया गेला
दीप के पमरिया

भजन
दीप के पमरिया

सासु मोरा ताना
दीप के पमरिया

हमरे ननदिया के
दीप के पमरिया

घरबारी निपा लिय
दीप के पमरिया

आई कलि के कनिया
दीप के पमरिया

राम के नामे
दीप के पमरिया

खेलेला अंगनमा
दीप के पमरिया

बड़ा शोर भेले ना
दीप के पमरिया

राजाजी लागी गेला
दीप के पमरिया
ऐसे और गाने
खेलेला अंगनमा

तुलसी सुखिया गेला
दीप के पमरिया

सासु मोरा ताना
दीप के पमरिया

हमरे ननदिया के
दीप के पमरिया

घरबारी निपा लिय
दीप के पमरिया

आई कलि के कनिया
दीप के पमरिया

राम के नामे
दीप के पमरिया

बड़ा शोर भेले ना
दीप के पमरिया

राजाजी लागी गेला
दीप के पमरिया

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

पहिल सपन देवकी देखली
डॉ. रानी झा

पिपही के बाजन सोहाओन
विभा झा

हर्षित मिथिलाक राजन जन जन हर्षित रे
रजनी-पल्लवी

पिया तोरा गोड़ लागु
विभा झा

पानहि शन धनी पातरी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

