पमरिया संगीत और नृत्य की परंपरा मिथिला की जीवंत सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है

दीप के पमरिया

हमारे बारे में

यह पमरिया समूह बिहार के मधुबनी ज़िले के दीप गाँव से है। इसके सदस्य हैं – मोहम्मद अली, मोहम्मद हफ़िज़, मोहम्मद नरुल आलम, मोहम्मद इस्राइल, मोहम्मद सईद पमरिया, मोहम्मद मुस्तफ़ा, मोहम्मद कैजुन पमरिया, मोहम्मद निज़ाम पमरिया और मोहम्मद इरफ़ान पमरिया। इस समूह के गायकों को भारत और विदेशों के अनेक लोक उत्सवों में कई लोक उत्सवों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं।

पमरिया बिहार का एक मुस्लिम लोक–कलाकार समुदाय है, जिसे परंपरागत रूप से हिंदू घरों में शिशु जन्मोत्सव पर आमंत्रित किया जाता है। आम तौर पर तीन कलाकारों का एक दल होता है—एक नर्तक और दो गायक या वादक। नर्तक घाघरा, चोली और दुपट्टा पहनकर ढोलक, ढोलकिया, खंझरी और घुँघरू की थाप पर नृत्य करता है, जबकि गायक बधइया (जन्मोत्सव के गीत), खिलौना, भजन और अन्य हिंदू–मुस्लिम लोक एवं भक्ति गीत गाते हैं। वे प्रायः मौके के अनुसार गीतों के बोल में बदलाव करके नवजात शिशु और परिवार को सम्मान देते हैं।

पमरिया संगीत और नृत्य की परंपरा मिथिला की जीवंत सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है। यद्यपि कुछ पमरिया कलाकारों को देश–विदेश में सम्मान प्राप्त हुआ है, फिर भी अधिकांश कलाकार सीमित आय ही अर्जित कर पाते हैं और धीरे-धीरे इस पेशे को छोड़ पारंपरिक आजीविका के अन्य साधनों की ओर बढ़ रहे हैं।

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