
गीत के बोल
एहन सुन्दर मिथिला धाम,
दोसर पाएब कोने ठाम ।-2
दुल्हा-दुल्हिन सीताराम, जनकपुर मे,
हे दुल्हा-दुल्हिन सीताराम, जनकपुर मे ।
हे बहिन सिया सुकुमारि धिया जनक दुलारि,
बहिन सिया सुकुमारि धिया जनक दुलारि,
रामजी कएलनि ससुरारी जनकपुर मे - 2
एहन सुन्दर मिथिला धाम,
दोसर पाएब कोने ठाम ।-2
दुल्हा-दुल्हिन सीताराम जनकपुर मे - 2
हे हम नइ करबइ ककरो आश,
जखन मिथिला हम्मर बास। -2
हम्मर बहिन अपन खास, जनकपुर मे - 2
हे धन-धन भेली जनक दुलारी,
नाचे मिथिला के नर-नारी । -2
दुल्हा बनिकऽ अएला राम, जनकपुर मे,
हे दुल्हा बनिकऽ अएला राम जनकपुर मे ।
एहन सुन्दर मिथिला धाम,
दोसर पाएब कोने ठाम ।-2
दुल्हा-दुल्हिन सीताराम जनकपुर मे - 3
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और गाने
विभा झा

दरदी सजना
विभा झा

मुदा छन मे
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
विभा झा

हम छी सीता
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा
ऐसे और गाने
एहन सुन्दर मिथिला धाम

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा

