
गीत के बोल
चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे - 2
सभ शान गुमान गमौलनि हे - 2
चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे,
चितचोरबा आइ ।
एहि चितचोरबा के माथे मण मौरिया हे - 2
चोरबा छवि छ्हरौलनि हे - 2
चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे - 2
सभ शान गुमान गमौलनि हे - 2
चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे,
चितचोरबा आइ ।
कथी केर उखरि कथी के मूसरबा रे - 2
कयए चोट चाउर छोड़ौलनि हे - 2
चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे,
चितचोरबा आइ ।
सोना केर उखरि रुपए मूसरबा रे - 2
आठ चोट चाउर छोड़ौलनि हे - 2
चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे - 2
सभ शान गुमान गमौलनि हे - 2
चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे,
चितचोरबा आइ ।
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गाने का विवरण
ओठंगर मिथिला विवाह का एक संस्कार है, जो कन्यादान के समय किया जाता है। आठ लोग एक गोल घेरे में खड़े होकर मूसल (समाठ) को पकड़ते हैं, और नाई उन्हें पीले जनेऊ (पवित्र धागे) से आपस में बांध देता है। वे पुरुषसूक्त (भगवान विष्णु के स्तुति-मंत्र) का तीन बार उच्चारण करते हैं और मिलकर ओखली में लाल धान को कूटते हैं। इस रिवाज क समय गाये जाने वाले गीत को ओठंगर कहते है। इस गीत में महिलायें दूल्हे को चितचोर कह पुकार रही हैं और कह रही है की आज तो यह चितचोर बंध ही गया है और अपना सारा मान अभिमान छोड़ चुका है । दूल्हे की सुंदरता और ओखली मुसल की भव्यता का भी जिक्र इस गीत में है।
और गाने
विभा झा

दरदी सजना
विभा झा

मुदा छन मे
विभा झा

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

यौ नारद कतए बुझा हम कहलौं
विभा झा

हम छी सीता
विभा झा

एहि बाटे भोला गेला
विभा झा

जखने बधइया माँगऽ
विभा झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

हम नइ जीयब बिनु राम
विभा झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा
ऐसे और गाने
चितचोरबा आइ बन्हौलनि हे

चलु देखु भरि नयना
रजनी-पल्लवी

अवध नगरिया सँ
रजनी-पल्लवी

प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
रजनी-पल्लवी

हे सीता माता कतेक तप केलौं
रजनी-पल्लवी

दुअरि छेकौनी अहाँ
रजनी-पल्लवी

भइया भउजि सँ करियौन विचार,
रजनी-पल्लवी

हम धनमा कुटैबइ एहि बड़बा सँ
रजनी-पल्लवी

आजु बाजए बधइया कोबर घर मे
रजनी-पल्लवी

हमरा अँगना मे उगि गेलइ चान
रजनी-पल्लवी

सिया के सोहाग दै लय
रजनी-पल्लवी

एहन सुन्दर मिथिला धाम
विभा झा

गीतिया मे चित्तिया
डॉ. रानी झा

आजु सोभा जनक मन्दिर
डॉ. रानी झा

जौ हम जनितहुँ
डॉ. रानी झा

धन दुल्हा रामचन्द्र धन मोरी सीता
डॉ. रानी झा

सुतल छलीयै बाबा के भवनबा मे
विभा झा

बरसा बरसे रे सबरिया
कंचन झा

गौरी पुजू जानकी जनक भवन मे
विभा झा

ऊँचा रे झरोखा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

धीया बिनु सूना
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

मेही भात जतन भनसिआ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

जाहि घर आहो बाबा
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

परिछनि चलियौ सखी
विभा झा

सुनू सखिया हे
विभा झा

चलु गौरी पूजन फुलवारी
कंचन झा

बाबा के अँगना
विभा झा

यौ दुल्हा चिन्ही लियौ
विभा झा

बेरी-बेरी बरजहुँ
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

समधि के हम गारि नइ दैय छी
डॉ. प्रेमलता मिश्रा

घर पछुअरबामे
विभा झा

परिछी कोई ले रे
कंचन झा


